Laxman Ram Burdak

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Laxman Ram Burdak

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Full NameLaxman Ram Burdak
Born22 May, 1954, Village Thathawata, Tehsil Ratangarh, Churu
ResidenceJaipur, Rajasthan
Nationality

Flag of India.png Indian

OccupationRetired Indian Forest Service (1980) Officer from Madhya Pradesh Cadre, President of Teja Foundation
Parent(s)Shri Begaram Burdak (Father), Shrimati Barji Burdak (Mother)
GotraBurdak

Mobile : +919826092101
Email : lrburdak@gmail.com

Laxman Ram Burdak is retired Indian Forest Service (1980) officer from Madhya Pradesh cadre. He is Presently settled at Jaipur after retirement on 31 May 2014. He is President of Teja Foundation, a social and community development organization based at Jaipur in Rajasthan. He is working on Jatland Website as Wiki Moderator and compiling community history.

Introduction

Laxman Ram Burdak is retired Indian Forest Service officer from Madhya Pradesh cadre. He is settled at Jaipur after retirement on 31 May 2014. He is working on Jatland as Wiki Moderator. He is known for his vast knowledge on Jat community and Jat history.

He was Born on May 22, 1954 at village Thathawata in Churu district of Rajasthan in the family of Ch. Begaram Burdak.

Married: He married with Gomati Nehra of Harsawa, Sikar, Rajasthan on 24.4. 1970. He has two daughters Sunita and Vinita and one son Amit.

Education: He completed his primary education from village Thathawata in 1965, middle school from Rosawan in 1968, Higher Secondary from Raghunath Multipurpose School Ratangarh in 1971, B.Sc. degree from Poddar College Nawalgarh in 1974 from and M.Sc. in Physics in 1976 from University of Rajasthan, Jaipur.

Career: He retired from the post of Additional Principal Chief Conservator of Forests Madhya Pradesh on 31 May 2014. He served initially as telecom engineer at Jaipur (1976-1979). Then he qualified for Indian Forest Service (IFS) in 1980. He served on various posts as DFO, CF, CCF and APCCF in the state of Madhya Pradesh from 1982-2014 after completing training 1980-82 at Dehradun/Mussoorie.

Bansagar Dame on 25.9. 2006

He is credited with achieving new dimensions in the field of Production Forestry, Minor Forest Produce Trade in Cooperative Sector, Joint Forest Management, Forest Rights Act Implementation, Forest and Environment Conservation, Watershed Management in Narmada River Valley Project and completion of last Multipurpose River Valley Mega Project, Bansagar Project of India on Sone River in 2006, during his posting as Commissioner Bansagar, which was pending since 1978. He was an instrument in drafting of M. P. State Forest Policy-2005. He is known for implementing peoples oriented policies particularly for farmers and tribals.

Social Services

Teja Foundation Team

Social Services: He has done free contribution of information related with Forest, Environment, Geography, History, Sociology etc on Wikipedia. Many interior places of historical and archaeological importance from Rajasthan, Madhya Pradesh and Gujarat have been brought into light of world community. He is working on Jatland Website (http://www.jatland.com/home/Main_Page) as Wiki Moderator with the purpose to unearth the ancient History of Jat community. Presently he is busy in online accomplishing the compilation, updation and research on History of Jats, Jat Gotras, Places connected with the Jats, Organizations and Monuments associated with the Jats. He has digitized and made available online books of prominent Historians and Jat History books on Jatland.com. He is Life member of various Jat Magazines and Jat Organizations.

He is President of Teja Foundation, a social and community development organization based at Jaipur in Rajasthan.

Address: 28 New Colony, Khatipura Flyover, Jhotwara, Jaipur-302012. Mob: 9826092101, 9680066814. Email: Lrburdak@gmail.com

जीवन परिचय

नाम - लक्ष्मण राम बुरड़क IFS

पिता का नाम - श्री बेगाराम बुरड़क

माता का नाम - श्रीमती बरजी बुरड़क

जन्म तिथि - 22 मई 1954

जन्म स्थान - गाँव : ठठावता, तहसील : रतनगढ़

जिला - चुरू, राजस्थान, पिनकोड - 331022

पारिवारिक पृष्ठ भूमि

पारिवारिक पृष्ठ भूमि - आपके पिता श्री बेगा रामजी एक प्रतिष्ठित किसान थे जिनका देहांत 4 मई 2012 को हो गया। आपकी माता जी का देहान्त 1976 में हो गया था। आपके चार बहिने हैं। आपकी शादी गोमती, पुत्री श्री हरदेव सिंह नेहरा गाँव हरसावा जिला सीकर, के साथ वर्ष 1970 में हुई। उस समय आपने दशवीं की परीक्षा दी थी। कालेज और विश्वविद्यालयीन शिक्षा शादी के बाद प्राप्त की। शिक्षा प्राप्त करने में माता-पिता और पत्नी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आपके दो पुत्रियाँ सुनीता, विनीता और पुत्र अमित हैं। सुनीता (MCA, Ph.D.Comp.Sc.) वर्तमान में वनस्थली विद्यापीठ (जयपुर सेंटर) में असोसिएट प्रोफ़ेसर के पद पर सेवारत है। उसका विवाह सीकर के श्री प्रवीण चौधरी (इंजीनियर BSNL) के साथ 16 नवम्बर 2002 को हुआ। सुनीता के दो पुत्रियां आशी और निशी हैं. विनीता (MCA) सोफ्टवेयर इंजीनियर है तथा उसका विवाह सीकर के श्री प्रवीण सुंडा (सोफ्टवेयर इंजीनियर Imfosys) के साथ 26 फ़रवरी 2009 को हुआ। पुत्र अमित AIEEE से चयनित होकर नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलोजी हमीरपुर (हिमाचल) से बी. आर्क. की डिग्री प्राप्त कर भोपाल में आर्किटेक्ट है। अमित का विवाह जयपुर की अंकिता (MBA) के साथ 1 फ़रवरी 2013 को हुआ।अंकिता इंटरनेट पर फ्रीलांसर लेखिका है।

शिक्षा

प्रारंभिक शिक्षा - प्रारंभिक शिक्षा गाँव ठठावता में प्राप्त की।उस समय वह गाँव का स्कूल मात्र एक कच्चा छप्पर था। उसी वर्ष सरकार से गाँव मे एक प्राथमिक स्कूल स्वीकृत हुआ। उस स्कूल भवन का निर्माण सब विद्यार्थियों और मास्टरजी ने ही मिलकर, किया कोई ठेकेदार आदि नहीं थे। वर्ष 1965 में गाँव में ही स्थित प्राथमिक विद्यालय से पांचवीं कक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।

माध्यमिक शिक्षा - गाँव ठठावता से दक्षिण में 10 किमी दूर सीकर जिले में स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय रोसावा से वर्ष 1968 में माध्यमिक शिक्षा प्रथम श्रेणी में पूर्ण की। यहाँ रोज रेगिस्तानी टीलों को पार कर पैदल ही आना-जाना पड्ता था।

उच्च शिक्षा - हायर सेकंडरी की शिक्षा श्री जालान रघुनाथ बहु-उद्देशीय हायर सेकंडरी स्कूल रतनगढ़ से वर्ष 1971 में पूर्ण की। हाई स्कूल (वर्ष 1970) में राजस्थान बोर्ड में प्रावीण्य सूची में नाम होने से मेधावी विद्यार्थियों को प्राप्त होने वाली राष्ट्रीय छात्रवृति से पुरुष्कृत किया गया। यह राष्ट्रीय छात्रवृति शिक्षा पूर्ण होने तक मिलती रही। महाविद्यालयीन शिक्षा सेठ जी. बी. पोद्दार महा-विद्यालय नवलगढ़ से गणित, रसायन विज्ञान तथा भौतिकी विषयों से विशेष योग्यता के साथ वर्ष 1974 में पूर्ण की। ये दोनों शिक्षा संस्थान राजस्थान के धन्ना सेठों की थीं जिन्होने आजादी और शिक्षा विस्तार के लिये क्रांतिकारी काम किये थे। तत्पश्चात राजस्थान विश्व-विद्यालय जयपुर से वर्ष 1976 में भौतिकी विषय से विशेष योग्यता के साथ मास्टर आफ साइंस की डिग्री प्राप्त की।

भारतीय वन सेवा में चयन

भारतीय वन सेवा में चयन पूर्व सेवा - शिक्षा पूर्ण होने के बाद भारतीय डाक-तार विभाग में अक्टूबर 1976 से मार्च 1980 तक दूर संचार अभियंता के पद पर जयपुर में कार्य किया। इसका प्रशिक्षण अहमदाबाद गुजरात में प्राप्त किया। केंद्र शासन की इस शासकीय सेवा के साथ-साथ कम्पीटीशन की तैयारी की। भारतीय वन सेवा में चयन के साथ-साथ ही आपका चयन राजस्थान प्रशासनिक सेवा में भी हुआ था परन्तु आपने भारतीय वन सेवा में आना पसंद किया।

भारतीय वन सेवा में चयन - वर्ष 1979 में लोक सेवा आयोग दिल्ली द्वारा आयोजित भारतीय वन सेवा की परीक्षा में सफलता प्राप्त की और 1 अप्रेल 1980 को देहरादून स्थित फारेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट में 2 वर्ष के प्रशिक्षण हेतू उपस्थित हुए. तत्पश्चात 3 माह का फाउंडेसन कोर्स मसूरी स्थित लाल बहादुर राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से पूर्ण कर मध्यप्रदेश संवर्ग में ज्वाइन किया।

मध्यप्रदेश संवर्ग में सेवा - मध्यप्रदेश संवर्ग में जुलाई 1982 -30.4.1983 तक मध्य बस्तर वन मण्डल में प्रोबेशनर के रूप में ज्वाइन किया। 7.5.1983 - 30.3.1984 तक शिवपुरी से अनुदेशक प्रशिक्षण शाला/उप वन मण्डल अधिकारी का प्रशिक्षण पूर्ण किया। 31 मार्च 1983 को दो माह पूर्व गठित लघु वनोपज संघ भोपाल में उप वन संरक्षक के रूप में पदस्थ हुए. 18.6.1985 - 23.7.1988 उत्पादन वन मण्डल भानुप्रतापपुर (बस्तर), 25 जुलाई 1988 से पश्चिम छिंदवाड़ा क्षेत्रीय एवं उत्पादन वन मण्डल (छिंदवाडा), 28 जुलाई 1990 से कार्य आयोजना अधिकारी दमोह तथा 15 जुलाई 1993 से मण्डल प्रबंधक वन विकास निगम बेतुल में वन मंडल अधिकारी के पद पर कार्य किया।

30 जनवरी 1995 को वन संरक्षक के पद पर पदोन्नत हुए और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण खंडवा में पदस्थ किये गए। 18 जनवरी 1997 से 14 जुलाई 2000 तक वन संरक्षक शिवपुरी के पद पर कार्य किया। 19 जुलाई 2000 से लघु वनोपज संघ भोपाल में महा प्रबंधक, 19 अप्रेल 2002 से प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में संयुक्त वन प्रबंध तथा मानव संसाधन विकास कक्षों में वन संरक्षक पद पर काम किया।

3.5.2005 को आप मुख्य वन संरक्षक मानव संसाधन विकास के पद पर पदोन्नत हुए। आप 22 नवम्बर 2005 से 12 अक्टूबर 2007 तक बाणसागर परियोजना रीवा में आयुक्त के पद पर पदस्थ रहे। 26 अक्टूबर 2007 से आपने मुख्य वन संरक्षक उत्पादन तथा 13 अक्टूबर 2008 से मुख्य वन संरक्षक वन भू-अभिलेख के पदों पर कार्य किया।

31 मार्च 2010 को अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक पद पर पदोन्नत होकर 2 जून 2011 तक आप वन भू-अभिलेख कक्ष भोपाल में कार्यरत रहे. 2 जून 2011 से सेवा निवृति दिनांक 31 मई 2014 तक अपर प्रबंध संचालक लघु वनोपज संघ के पद पर रहे।

भारतीय वन सेवा में विशेष उपलब्धियां

मध्य प्रदेश में आपकी छवि संवेदनशील, गरीब हितैषी तथा कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की है। आपके कार्यकाल में अनेक जन हितैषी नई योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया यथा प्रथम बार सहकारी समितियों के माध्यम से लघु वनोपज संघ द्वारा वनोपज का संग्रहण और संग्राहकों को लाभ विभाजन, विभाग में प्रथम बार 80 के दशक में उत्पादन वन मण्डल में विश्व खाद्य योजना का लागू करना, विश्व वानिकी योजना का क्षेत्रीय क्रियान्वयन, वन अधिकार अधिनयम का क्रियान्वयन आदि। कुछ विशेष उपलब्धियों का उल्लेख करना यहाँ समीचीन होगा।

वन मंडल अधिकारी उत्पादन भानुप्रतापपुर बस्तर मे पदस्थापना के दौरान वन विदोहन की प्रबंधन तकनीकों यथा उपयुक्त लगुण निर्माण, सामयिक परिवहन और निरवर्तन पद्धति में सुधार कर दो साल में शासकीय राजस्व को 2.5 गुना किया।

जन भागीदारी से संयुक्त वन प्रबंधन प्रणाली लागू कर वन संरक्षण के विशेष कार्य किये तथा शिवपुरी वन वृत्त के वन आवरण में 214 वर्ग किमी (गुना 135 + शिवपुरी 79) वृद्धी की। भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून 1999 रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई.

नवम्बर 2005 से अक्टूबर 2007 तक बाण सागर परियोजना रीवा में आयुक्त के पद पर पदस्थ रहे. यह पूर्णतः नया काम था. उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार प्रदेशों की सिंचाई क्षमता बढ़ाने और विद्युत् उत्पादन करने वाली 28 वर्ष से लंबित इस बहु-उद्देशीय बांध परियोजना को पूर्ण करने में महत्व पूर्ण भूमिका निभाई। तीन दशकों से लंबित परियोजना की डी. पी. आर. पूर्ण कर अन्य प्रदेशों से मध्य प्रदेश को रु. 120 करोड़ की राशि दिलवाई। बाण सागर परियोजना में विस्थापितों के लिए रोजगार मूलक योजनाएं शुरू की। युद्ध स्तर पर नहरों के लिए भू-अर्जन किया. मुआवजा भुगतान की नई पारदर्शी व्यवस्था बैंकों के माध्यम से लागू कर संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाई। विश्व बैंक के मूल्यांकन दल द्वारा इन क़दमों की भूरि-भूरि प्रशंसा की गयी । उल्लेखनीय है कि इस परियोजना का शुभारम्भ वर्ष 1978 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई द्वारा किया गया था। 28 वर्ष बाद आपके कार्यकाल में 25 सितम्बर 2006 को पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा इस परियोजना का राष्ट्र को समर्पण किया गया।

मुख्य वन संरक्षक उत्पादन के रूप में कार्य करते हुए प्रदेश के किसानों को काफी लाभ पहुँचाया। पिछले कई वर्षों से किसानों के खेतों में उगने वाली इमारती लकड़ियों के बाजार भाव संशोधित नहीं किये गए थे। आपने किसानों से चर्चा कर प्रदेश के विभिन्न इमारती लकड़ी के डिपो में प्राप्त दरों के आधार पर निजी खेतों की इमारती लकड़ियों के बाजार भाव संशोधित करवाकर बढ़ाये गए जिससे उनको अधिक मूल्य प्राप्त हुआ।

वन भू-अभिलेख मुखिया के रूप में अक्टूबर 2008 से मई 2011 तक अवधी में भारत सरकार द्वारा हाल ही में पारित वन अधिकार अधिनियम 2006 का क्रियान्वन किया जाना था। इसके अंतर्गत वन क्षेत्रों में और उनके आस-पास रहने वाले वनवासियों को उनके अधिकारों की मान्यता आदिम जाति कल्याण विभाग के समन्वय से दिलाई जानी थी। आपके प्रयाशों और समन्वय से इन गरीब वनवासियों को अधिकार दिलाने में मध्य प्रदेश सम्पूर्ण देश में प्रथम रहा।

वनोपज के व्यापार के प्रबंधन प्रणाली में उचित सुधार कर वर्ष 2012 के लाभांश को रु. 245 करोड़ तक के ऐतिहासिक उच्च स्तर तक पहुँचाया। लघु वनोपज सहकारी संघ के इतिहास में यह सर्वाधिक लाभांश रहा।

अभिरुचियाँ

लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी मसूरी में योग प्रदर्शन 28.6.82

अभिरुचियाँ - अध्ययन, पर्यटन, गार्डनिंग तथा समाज सेवा. पिछले 12 वर्षों से शासकीय कार्यों के साथ-साथ आपके द्वारा वन, पर्यावरण, भूगोल, जल संसाधन, समाज विज्ञान, समुदायों, इतिहास आदि विषयों पर विकिपीडिया में मुफ्त योगदान किया जा रहा है. मध्यप्रदेश, राजस्थान और गुजरात प्रदेशों की ऐतिहासिक और पुरात्तव महत्व की जानकारियां विश्व समुदाय को उपलब्ध करवाई। आप बचपन से नियमित योग करते हैं।

सामाजिक गतिविधियाँ

आप जाटलैंड वेब साईट (http://www.jatland.com/home/Main_Page) के मोडरेटर हैं तथा इस पर ऑनलाइन जाट इतिहास के शौध और लेखन का कार्य कर रहे हैं. इसमें जाट इतिहास, जाट गोत्रों का इतिहास और उनका वितरण, जाट गाँवों का इतिहास, जाटों का जीवन, संस्कृति और परम्पराएं, जाटों का खानपान, जाट संगठन और जाट संस्थाएं, जाट भाषाएँ आदि के संकलन का कार्य किया जा रहा है.

जाट बौद्धिक मंच और प्रतिभा सम्मान समारोह रतनगढ: दिनांक 19.10.2014

जाट बौद्धिकमंच और प्रतिभा सम्मान समारोह दिनांक 19.10.2014
जाट बौद्धिकमंच रतनगढ 19.10.2014

रतनगढ में जाट बौद्धिकमंच और प्रतिभा सम्मान समारोह दिनांक 19.10.2014 को ग्रामीण किसान छात्रावास रतनगढ में आयोजित किया गया. समारोह में 10 वीं और 12 वीं कक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले प्रतिभावान बच्चों को सम्मानित किया गया.

समारोह में उपस्थित मुख्य महानुभाव थे -

लक्ष्मण राम बुरड़क - मुख्य अतिथि

दूला राम सहारण - विशिष्ठ अतिथि

ताराचंद पायल - अध्यक्ष

भंवर लाल डूडी - अध्यक्ष जाट बौद्धिक मंच

मुकंदा राम नेहरा - सचिव

पूरा राम गांधी - कार्यक्रम संचालक

कार्यक्रम में सम्मानित विद्यार्थी:

हेत राम धेतरवाल - आइ आइ टी में चयन

शुभम हुड्डा - एम बी बी एस में चयन

अनिता डूडी - एम बी बी एस में चयन

भानी राम सारण - एम बी बी एस में चयन

कमलेश खीचड़ - एम बी बी एस में चयन

पूनम खीचड़ - बी वी एस में चयन

राकेश बिजारणिया - राज्य सेवा में चयन

रुकमा नंद भींचर - राज्यपाल द्वारा सम्मानित शिक्षक

समाज-जागृति के सौ साल: समारोह 31.8.2017

जाट कीर्ति संस्थान चुरू द्वारा समाज-जागृति के सौ साल का समारोह दिनांक 31.8.2017 को ग्रामीण किसान छात्रावास रतनगढ़ में तेजा दशमी के अवसर पर मनाया गया।

भूमिका: शिक्षा और संघर्ष के बल पर हमारा समाज रूढ़िवाद औऱ पाखंडवाद के शिकंजे से मुक्त होकर आधुनिकता के पथ पर आगे बढ़ सका। चूरू के भैरुंसर गांव में श्री बींजाराम कस्वां के घर जन्मे स्वामी गोपालदास ने नव चेतना के अग्रदूत बनकर 1907 ई. में चूरू में सर्वहितकारिणी सभा की स्थापना कर शिक्षा के प्रचार-प्रसार, समाज-सुधार और जनहित का बीड़ा उठाया। उन्होंने 1912 ई. में महिला- शिक्षा के लिए पुत्री पाठशाला औऱ अछूतोद्धार के लिए दलित बस्ती में कबीर पाठशाला खोलने का क्रांतिकारी कदम उठाया। ताकतवर बनने के लिए शिक्षा जरूरी है, इस तथ्य को स्वीकारते हुए और स्वामी गोपालदास के नक्शे-कदम पर चलते हुए चौधरी बहादुर सिंह भोबिया ने 9 अगस्त 1917 को तमाम अवरोधों के बावजूद राजस्थान में समाज के नाम से पहली स्कूल 'जाट एंग्लो संस्कृत मिडल स्कूल, संगरिया की स्थापना की और समाज में शिक्षा-जागृति के प्रथम पुरोधा बने। भोबिया जी के असामयिक निधन के बाद इस संस्था की नाव के खेवनहार चौधरी हरिश्चंद्र नैन बने। 1932 में इस स्कूल के संचालन का दायित्व स्वामी केशवानन्द (मंगलूणा में जन्मे ढाका जाट) को सौंपा गया। स्वामी जी ने इस संस्था का कायापलट करते हुए इसे उत्तर भारत की एक प्रगतिशील शिक्षण संस्था के रूप में विकसित किया और 1948 ई. में इसका नाम बदलकर 'ग्रामोत्थान विद्यापीठ, संगरिया ' किया गया। इस संस्थान के तहत बीकानेर संभाग के देहाती इलाके में 287 स्कूल खोलकर हर इलाके में शिक्षा की अलख जगाई गई। समाज के संघर्षशील महानुभावों की अगुवाई में देहाती छात्रों के आवास और शिक्षा के प्रबंध हेतु विभिन्न कस्बों में छात्रावास व छात्रावास मय स्कूल स्थापित किए गए।

समारोह रतनगढ़ में क्यों?

युगद्रष्टा स्वामी गोपालदास ने सर्वहितकारिणी सभा के तहत रतनगढ़ में भी जनहित के काम संपादित किए। शिक्षा-संत स्वामी केशवानन्द का बचपन का कुछ समय रतनगढ़ में बीता था तथा 1944 से संचालित विद्यार्थी भवन, रतनगढ़ (जो अब किसान छात्रावास के नाम से जाना जाता है) का विधिवत उद्घाटन 13-14 अप्रैल 1946 को स्वामी केशवानन्द के कर कमलों से सम्पन्न हुआ था। चौधरी हरिश्चंद्र नैन के पुरखे रतनगढ़ तहसील के बछरारा गांव के निवासी थी औऱ हरिश्चंद्र जी का जन्म सरदारशहर तहसील के कुंतलसर गांव में हुआ था। चौधरी बहादुर सिंह भोबिया के पिताजी सरदारशहर के जैतसीसर गांव के मूल निवासी थे।

विद्यार्थी भवन, रतनगढ़ में संचालित राजनीतिक गतिविधियों की ही परिणीति थी कि जागीरी ज़ुल्म के विरुद्ध लोहा और कांगड़ आंदोलन का आगाज समाज के जुझारुओं ने किया।

राजशाही के दमनकारी शासन और सामन्ती उत्पीड़न के ख़िलाफ़ चौधरी हनुमान सिंह बुडानिया, चौधरी कुम्भाराम आर्य, चौधरी हरिराम ढाका नोरंगसर, चौ. चुनाराम चाहर कांगड़, चौ. बुधराम डूडी सीतसर, चौ. कुरड़ाराम घुमन्दा, चौ. रूपाराम मान, स्वामी नित्यानंद खींचिवाला व समाज के अन्य संघर्षशील लोगों ने लड़ाई लड़कर मुक्ति संघर्षों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया और समाज को जागृत किया।

शिक्षा के प्रचार-प्रसार और मुक्ति संघर्षों मे अगुवाई करने वाले समाज-शिरोमणियों के योगदान का स्मरण करना और उन्हें सम्मानित करने का दायित्व हम सब समाज बंधुओं का बनता है। समाज- जागृति के सौ साल पूरे होने के अवसर पर रतनगढ़ में आयोजित स्मरण-समारोह में सम्मिलित होकर समाज के सितारों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना हमारा दायित्व था। उन्होंने कष्ट सहे, जेल की सजा भुगती, यातना सही ताकि हम शिक्षित हो सकें और सामन्ती उत्पीड़न से आज़ाद होकर प्रगति की राह पर आगे बढ़ते चलें।

समारोह में क्या हुआ?

  • बीकानेर संभाग में फैली हुई समाज की विरासत यथा शिक्षण संस्थाओं के भवन, छात्रावासों के भवन तथा अन्य ऐतिहासिक और सामाजिक स्मारक भवनों की तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई गई।
  • समाज के इतिहास और साहित्य संबंधी पुस्तकों की तस्वीर लगाकर प्रदर्शनी की तथा क्रय-विक्रय हेतु साहित्य के स्टॉल लगाए गए।
  • शिक्षा और संघर्ष में अगुवाई करने वाले समाज-शिरोमणियों की तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई गई तथा उनके योगदान पर इतिहासज्ञों व शिक्षाविदों द्वारा व्याख्यान दिये गए।
  • शिक्षा के प्रचार-प्रसार और सामन्ती उत्पीड़न के मुक्ति संघर्षों के इतिहास को आलोकित करते हुए प्रकाशित की गई पुस्तक का विमोचन किया गया।
  • समाज-शिरोमणियों को उनके योगदान का स्मरण करते हुए श्रदांजलि एवं उनके परिजनों का अभिनन्दन किया गया।
  • सामाजिक रूढ़ियों व बुराइयों के उन्मूलन पर विचार-मंथन
  • समाज की वर्तमान दशा के संदर्भ में भावी दिशा पर मार्गदर्शन।

समारोह की उल्लेखनीय पहल

  • कोई स्टेज नहीं। सभी समान धरातल पर बैठे।
  • कोई मुख्य अतिथि या विशिष्ट अतिथि नहीं। मुख्य वक्ता के रूप में इतिहासज्ञ, शिक्षाविद, साहित्यकार एवं सामाजिक सरोकारों से संबंधित गणमान्य लोग।
  • किसी को माल्यार्पण करने का कोई प्रावधान नहीं।
  • किसी राजनीतिक मुद्दे या राजीनीतिक एजेण्डे से इस समारोह का कोई सरोकार नहीं।
  • बीकानेर संभाग में शिक्षा और संघर्ष के इतिहास पर नई दृष्टि से चिंतन-मनन।
  • समारोह दिनांक 31 अगस्त 2017 को तेजा दशमी के अवसर पर आयोजित कर लोगों को तेजाजी का इतिहास और उनके बलिदान से अवगत कराया।
  • समारोह-स्थल: किसान छात्रावास, रतनगढ़ (चूरू)

आमंत्रित मुख्य वक्तागण

  • डॉ भरत सारण (संस्थापक, फिफ्टी विलेजर्स संस्थान, बाड़मेर)
  • चौधरी भीमसिंह आर्य (विद्यार्थी भवन, रतनगढ़ के पूर्व विद्यार्थी एवं जागीरी ज़ुल्म पर लिखी पुस्तक के लेखक)
  • जाट-रत्न मासिक पत्रिका के मुख्य संपादक/प्रकाशक: जसवीर सिंह मालिक, रोहतक, हरियाणा
  • सम्मानित हुये साहित्यकारों का उद्बोधन
  • समाज औऱ अपने पुरखों के संघर्षों के असली इतिहास से अवगत कराया कि हमारे पुरखे क्या थे, हम क्या हैं और हमें किस दिशा में आगे बढ़ना है।

सम्मान

जाट कीर्ति संस्थान चुरू द्वारा 31.8.2017 को ग्रामीण किसान छात्रावास रतनगढ में प्रदान किया गया सम्मान

श्री लक्ष्मण बुरड़क को इंटरनेट पर विकिपीडिया और जाटलैंड डॉट कॉम वेबसाइट के माध्यम से समाज का इतिहास विश्व-स्तर पर सर्व सुलभ कराने एवं समाज के इतिहास को डिजिटाइज़ करने के प्रक्रिया प्रारम्भ करने के लिए इतिहासज्ञ का ठाकुर देशराज सम्मान जाट कीर्ति संस्थान चुरू द्वारा 31.8.2017 को ग्रामीण किसान छात्रावास रतनगढ में प्रदान किया गया.

तेजा फाउण्डेशन जयपुर

तेजा फाउंडेशन टीम

वर्तमान में समाज के समक्ष उत्पन्न चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समाज के व्यापक एवं दीर्घकालिक हित की सुचिंतित योजनाएं बनाकर सामाजिक सरोकार की गतिविधियां संचालित करने के उद्देश्य से समाज के अनुभवी एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े महानुभावों की आपसी सहमति से तेजा फाउंडेशन की स्थापना कर उसका रजिस्ट्रेशन मार्च 2017 में करवाया गया।

फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री लक्ष्मण बुरड़क, सेवा निवृत आई.एफ.एस. अधिकारी व समाज के इतिहासज्ञ तथा सचिव श्री रामस्वरुप चौधरी, समाज-चिंतक व समर्पित समाजसेवी हैं।

विज़न

पाखण्ड-मुक्त, रूढ़ियों से मुक्त, प्रगतिशील, आधुनिक समाज का निर्माण कर सशक्त, समृद्ध व एकजुट समाज का सपना साकार करना।

मिशन

समाज की दमदार उपस्थिति हर क्षेत्र व मंच पर सुनिश्चित करने हेतु सूझ-बूझ व रणनीतिक कौशल के साथ सामाजिक सरोकारों की गतिविधियां संचालित करना।

समाज के सबलीकरण के लिए शिक्षा व रोज़गार में समाज के प्रतिनिधित्व में अभिवृद्धि करना और संसाधनों के स्वामित्व पर विशेष ध्यान केंद्रित करना।

कई दौर की लंबी बैठकों में हुए विचार-विमर्श के उपरांत फिलहाल तात्कालिक आवश्यकता की निम्नलिखित दो गतिविधियां संचालित करने का निर्णय हुआ:

1. अधिकारी वर्ग की सरकारी सेवाओं में समाज के प्रतिनिधत्व में बढ़ोतरी के लिए समाज की जरूरतमंद होनहार प्रतिभाओं का चयन कर उनके लिए गुणवत्तापूर्ण फ्री कोचिंग की व्यवस्था करना।

2. समाज के समृद्ध इतिहास को गुमनामी के अंघेरे से बाहर निकालकर उसका व्यापक प्रचार-प्रसार करना एवं समाज के इतिहास का संकलन, शोधन एवं प्रकाशन करना।

दूरगामी महत्त्व की गतिविधियों का आगाज

तेजा फाउंडेशन के तत्वावधान में समाज के जरूरतमंद होनहार युवाओं के लिए तेजा विला, सन्तोष नगर, गोपालपुरा, जयपुर में बैंक पी. ओ. की निःशुल्क कम्युनिटी लेवल कोचिंग की शरूआत श्री महेंद्र सिंह जी चौधरी, आई.जी. पुलिस, के मुख्य आतिथ्य तथा स्वामी केशवानंद जी की परम्परा में उस संप्रदाय के साधु महंत माधोदास उदासीन जी के सानिध्य में 24 जुलाई को एक सादा कार्यक्रम से हो चुकी है। यह सुखद संयोग है कि 24 जुलाई से ही आर.आर.बी. के बैंक पी.ओ. की वैकेंसी के लिए फॉर्म भरने की शुरुआत हुई है। इस अवसर पर कोचिंग के लिए भवन व आवास सुलभ करवाने वाले समाज के भामाशाह श्री पाबुराम जी गठाला, आदर्श जाट महासभा राजस्थान के अध्यक्ष श्री रामनारायण जी चौधरी, तेजा फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं जाट लैंड डॉट कॉम वेबसाइट के प्रणेता तथा सेवानिवृत आईएफएस अधिकारी श्री लक्ष्मण जी बुरड़क, कोचिंग संचालन के लिए गठित समिति के संयोजक प्रो. एच. आर. ईसराण तथा सह-संयोजक प्रो. डी.सी. सारण, तेजा फाउंडेशन के सचिव श्री राम स्वरुप चौधरी, वरिष्ठ समाजसेवी श्री लक्ष्मण जी महला, सेवाभावी अन्य समाज बंधु, कोचिंग के लिए चयनित विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ इन पलों के सहभागी बने ।

कोचिंग के लिए लगभग 20 जिलों से प्राप्त आवेदनों की जांच कर निर्धारित मानदण्ड के अनुरूप मेरिट सूची तैयार की गई । Merit-cum-Performance-cum-Need के पैमाने को ध्यान में रखते हुए Written test और Interview आयोजित करने के बाद उनका समग्र मूल्यांकन कर 30 विद्यार्थी चयनित किए गए जो 13 जिलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन चयनित अधिकांश स्टूडेंट्स के परिवार में जीवन -यापन का जरिया खेती या मजदूरी है।

कोचिंग के लिए क्लासरूम टीचिंग, स्टडी मटेरियल, ऑनलाइन टेस्ट के लिए स्टूडेंट्स का मेम्बरशिप रेजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन टेस्ट सीरीज , लाइब्रेरी सुविधा, आवास व्यवस्था आदि निःशुल्क है।

कोचिंग स्थल पर ही सुसज्जित लाइब्रेरी सुविधा मय आवश्यक पुस्तकों, पत्रिकाओं व समाचार-पत्रों के सुलभ करवाई गई है। ऑन-लाइन टेस्ट के लिए प्रैक्टिस करने हेतु पांच कम्प्यूटर सिस्टम व प्रिंटर आदि स्थापित किए गए हैं। विद्यार्थियों के फॉर्म भरने की व्यवस्था भी कोचिंग स्थल पर कर फीस आदि पर होने वाला व्यय का भुगतान भी फाउंडेशन द्वारा किया गया है। राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं (RAS) में भर्ती की विज्ञप्ति जारी होने पर इसकी भर्ती-परीक्षा के लिए भी कोचिंग शुरू करना विचाराधीन है।

2. समाज के समृद्ध इतिहास व साहित्य के संकलन एवं शोधन और समकालीन संदर्भों में उसके विवेचन हेतु डॉ पेमाराम , इतिहासवेत्ता एवं श्री लक्ष्मण बुरड़क, इतिहासज्ञ के संयोजकत्व व मार्गदर्शन में गठित समिति कार्य कर रही है।

जाट कीर्ति संस्थान, चूरू द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'समाज जागृति के सौ साल: बीकानेर सम्भाग में शिक्षा और संघर्ष का संक्षिप्त इतिहास' का विमोचन तेजा दशमी ( 31 अगस्त 2017) के अवसर पर ग्रामीण किसान छात्रावास, रतनगढ़ में आयोजित स्मरण- समारोह 'समाज जागृति के सौ साल' में समाज के वयोवृद्ध एवं प्रबुद्धजनों ने किया। इस पुस्तक में संकलित ऐतिहासिक सामग्री, जो बीकानेर सम्भाग के विशेष संदर्भ में है , से संबंधित तथ्यात्मक विवरण व फ़ोटो सुलभ करवाने में तेजा फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं जाटलैंड डॉट कॉम (https://www.jatland.com/) के मॉडरेटर श्री लक्ष्मण बुरड़क की महति भूमिका रही है। इस पुस्तक में समाज के इतिहास के विभिन्न पक्षों को नए संदर्भों व कलेवर में आलोकित करने की पहल की गई है।

श्री लक्ष्मण बुरड़क ने स्वयं के स्तर पर प्रयास कर समाज का इतिहास एवं समाज-शिरोमणियों की लोक छवि जाटलैंड डॉट कॉम वेबसाइट (https://www.jatland.com/) पर संकलित कर उसे इंटरनेट के माध्यम से सर्व सुलभ कराने का प्रशंसनीय कार्य कर रहे हैं। श्री बुरड़क साहब ने समाज के इतिहास के डिज़ीटिकरण की प्रक्रिया भी प्रारम्भ कर दी है।

अनुरोध है कि अगर किसी समाज-बंधु के पास समाज के इतिहास से संबंधित कोई दुर्लभ पुस्तक या दस्तावेज हो तो उसे तेजा फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री लक्ष्मण बुरड़क को उपलब्ध करवा दें ताकि उसका डिज़ीटिकरण कर उसे संरक्षित किया जा सके।

आशा है कि समाज के सतत सहयोग एवं मार्गदर्शन से फाउंडेशन की गतिविधियां परवान पर चढ़ सकेंगी।

प्रवास

लक्ष्मण राम बुरड़क द्वारा की गई कुछ यात्राओं विवरण यहाँ दिया जा रहा है:

संदर्भ

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