Devi Lal Ji.jpg

25 September
is the birthday of Chaudhary Devi Lal

Flowers.png

Faizal Purian

From Jatland Wiki
(Redirected from Singhpuria Misl)
Jump to navigation Jump to search
Map of Misls of Sikhs

Faizal Purian (फैजलपुरिया) or Singhpuria Misl (सिंहपुरिया मिसल) was one of the Sikh Misals in Punjab. The leader of this Misal was Chaudhary Daleep Singh who was a true follower of the Panth. This Misal is also known by the name Singhpuria Misal.

Origin

The misl derives its name from Faizalpur village. A resident of this village, Kapur Singh Virk was the person who led this Misal. About him, Thakur Deshraj Writes in his book as :

फैजलपुरिया मिसल या सिंहपुरिया मिसल

अमृतसर के पास बुआवा जालंधर में फैजुलपुर एक गांव है। यहीं के जाट सरदार कपूरसिंह ने इस मिसल को कायम किया। कपूरसिंह को फर्रुखशियर के समय में नवाब का खिताब मिला था और वह खालसा का बड़ा लीडर बन गया। उसके धर्मोपदेश के जोश के कारण अगणित जाट सिख धर्म में शामिल हो गये। यहां तक कि पटियाले के राजा आलासिंह ने भी उसके हाथ से सिख धर्म की दीक्षा ली थी। ढाई हजार सवार हर समय उसके पास तैयार रहते थे। देहली तक लूट मार करने में इसको कोई रोकने वाला नहीं था। सतलज के दोनों किनारों पर इसका अधिकार हो गया। सभी मिसलों के सरदार इसे श्रद्धा की दृष्टि से देखते थे, और सबकी निगाह में नवाब कपूरसिंह महात्मा था। इसके राज्य के प्रमुख स्थानों में से जालन्धर, नूरपुर, बहरामपुर, पट्टी और भरतगढ़ के इलाके विशेष उल्लेखनीय हैं। इसकी मृत्यु के बाद इसका बेटा खुशहालसिंह रियासत और मिसल का सरदार बना। खुशहालसिंह ने भी बहादुरी के साथ इस मिसल का नेतृत्व किया। 1795 ई० में खुशहालसिंह की मृत्यु के पश्चात् मिसल का सरदार उसका पुत्र बुधसिंह हुआ, जिससे महाराज रणजीतसिंह ने कुल प्रदेश जीतकर अपने अधिकार में कर लिया। किन्तु पीछे जब महाराज रणजीतसिंह की ब्रिटिश गवर्नमेंट से मित्रता हुई और दोनों राज्यों की सीमा बन्दी हुई तो इसका इलाका ब्रिटिश गवर्नमेंट की हद में आ गया, जिसमें से कुछेक देहात बुधसिंह की औलाद के पास अब तक हैं।[1]

Organization

The annual income of this Misal was five Lakh. Daleep Singh, himself received Pahul from Guru Gobind Singh. His son Kapura Singh converted all the Jats of these territories into Sikhs. His son Budh Singh constructed the sacred tank of Taran Taran at a cost of Rupees one lakh.

Notable persons

Kapur Singh Virk

External links

References