Ikshvaku

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Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Ikshvaku (Sanskrit: इक्ष्वाकु) was the first king of the Ikshvaku dynasty and founder of the Ikshvaku-Vansh, or Suryavansh Dynasty of Kshatriyas in Vedic civilization in ancient India.

Genealogy of Ikshvaku dynasty

BrahmaMarichiKashyapaVivasvan or SuryaVaivasvata ManuIkshvakuKukshi / VikukshiBanaAnaranyaPrithu .... and so on.

Variants of name

Jat Gotras

Jat Gotras originated from Ikshvaku are - Nehra, Kakustha

Mention by Panini

Ikshavaku (इक्ष्वाकु ) is a term mentioned by Panini in Ashtadhyayi. [1]

History

Ram Sarup Joon[2] writes that...When Aryans came to India They called themselves the descendants of Manu and remembered the tragedy of the flood. They came to India in two groups. Their strength cannot be ascertained. One of those advanced straight through the northern plains and founded the town of Ayodhya. The leader of this group was Ikshwaku, who had eight brothers and one sister named Ahalya (or Ela). On arrival at Ayodhya this group clashed with the original inhabitants and drove them down South. The other group settled down on the banks of River Ganga in the area around Haridwar, and stayed there for many generations. The leader of this group was Buddha (not to be confused with Buddha who founded Buddhist Religion). Buddha married Ikshvaku’s sister Ahalya. In his Dynasty were Pandwa etc (not of Mahabharat age/epic). His son was Nahak and his son Yayati, father of Jats.


Historians of the Rajput period have called the Ikshwaku group as Surya Vanshi and the Buddha group as Chandra Vanshi, corresponding to the Sun and Moon. Their origin has been linked with Brahma the creator of the universe. The following genealogical tree was drawn out.

Brahma
___________________|_____________________
|				      |		
Suryavansh			Chandravansh
|	                              |
Marichi	   		      Atriya
|				      |	
Kashyap			       Samudra 
|					|	
    			              Soma
|					|	
Vaisuta Manu	                     Brahaspati
|				        |	
Man Vantra
|				        |	
Ikshwaku                            Buddha  

The names included in this table, above Ikshwaku and Buddha are just synonyms of the Sun, Moon and Planets.

इतिहासकार स्वामी ओमानन्द सरस्वती लिखते हैं -

.....विदेशी विद्बान तथा उनका अन्धानुकरण करने वाले कुछ भारतीय विद्वान् भी यह कहते हैं कि 'आर्य' लोग ईरान से आये, इसलिये इन लोगों का नाम आर्य है । इससे पूर्व यहाँ जंगली लोग बसते थे । आर्य लोग अपने को देवता बतलाते थे और उनका जब संग्राम हुआ तो उन्होंने उसका नाम 'देवासुर संग्राम' कथाओं में ठहराया । विदेशी लोगों की इस प्रकार की कल्पनायें सर्वथा झूठ और निराधार हैं । किसी भी प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ में व इतिहास में कहीं भी यह नहीं लिखा कि आर्य लोग ईरान से आये और यहां के जंगलियों से लड़ कर और विजय पाकर उन्हें निकाल इस देश के राजा हुये । ऐसी अवस्था में इन चालाक विदेशियों का लेख कैसे मान्य हो सकता है । यदि उसमें किञ्चित-मात्र भी सत्य होता तो आर्यावर्त से पूर्व इस देश का क्या नाम था ? यह प्रमाण देकर आज भी कोई विदेशी तथा इस मत वाला लिखने का साहस करे ।

यथार्थ बात यह है कि आर्यों से पूर्व इस देश में कोई नहीं बसता था, अतः इस देश का कोई अन्य नाम नहीं था । आदि सृष्टि में इस पवित्र आर्यावर्त्त के एक भाग तिब्बत में मनुष्य जाति उत्पन्न हुई । यहीं से आर्य लोग सम्पूर्ण आर्यावर्त्त तथा अन्य देशों में भी जाकर बसे । आर्यावर्त्त के बाहर पूर्व, पश्चिम, उत्तर आदि दिशाओं में जो मनुष्य रहते हैं, उन्हीं का नाम असुर सिद्ध होता है । जब जब ये असुर लोग हिमालय प्रदेशस्थ आर्य लोगों पर लड़ने को चढ़ाई करते थे तो यहाँ के आर्य राजा उन उत्तरादि दिशाओं में लड़ने के लिये देवता अर्थात् आर्यों की सहायता के लिये जाते थे । इतिहास साक्षी है कि आर्यवर्त्तीय अर्जुन तथा महाराजा दशरथ आदि ने इसी प्रकार के देवासुर संग्रामों में आर्यों की सहायता और रक्षा की तथा असुरों को हराया । इसी आर्यावर्त्त के प्रथम चक्रवर्ती राजा इक्ष्वाकु हुये हैं । इन्होंने तथा इनके पूर्वज ब्रह्मा, विराट्, मनु आदि ने इस आर्यावर्त्त को बसाया था । इसी का नाम ब्रह्मावर्त भी है । क्योंकि इसके ब्रह्म विद्वान् देव लोग बसने बसाने वाले थे । इसी आर्यावर्त्त अथवा ब्रह्मावर्त्त का एक भाग आधुनिक हरयाणा प्रान्त है । यह एक प्रकार से आर्यावर्त्त का हृदय स्थान है और प्राचीन काल से यह देवताओं का स्थान कहलाता है ।[3]

External Links

References


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