Laxman Ram Pichakiya
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Laxman Ram Pichakiya (Sepoy) (01.03.1997 - 03.02.2021) became martyr of militancy on 03.02.2021 in Sundarbani area of Jammu and Kashmir. He was from Khejarla town in Bilada tahsil of Jodhpur district in Rajasthan.
Unit: 61 Rashtriya Rifles/21 Jat Regiment
सिपाही लक्ष्मण राम पिचकिया
सिपाही लक्ष्मण राम पिचकिया
3212512L
01-03-1997 - 03-02-2021
सेना मेडल (मरणोपरांत)
यूनिट - 61 राष्ट्रीय राइफल्स/21 जाट रेजिमेंट
ऑपरेशन रक्षक
सिपाही लक्ष्मण राम का जन्म 21 मार्च 1997 को राजस्थान के जोधपुर जिले की बिलाड़ा तहसील के खेजड़ला गांव में श्री किशनाराम पिचकिया एवं श्रीमती मांगी देवी के परिवार में हुआ था। बीए की शिक्षा प्राप्त करते समय ही वर्ष 2015 में वह भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 21 जाट रेजिमेंट में सिपाही के पद पर नियुक्त किया गया था।
वर्ष 2020 में उनकी बटालियन को जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद विरोधी अभियानों में 61 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन के साथ संलग्न किया गया था। सितंबर 2020 में 61 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के सुंदरबनी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात किया गया था।
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में सिपाही लक्ष्मण अवकाश पर घर आए थे। 27 अप्रैल 2021 को उनका विवाह होना निश्चित हो गया था। अतः उन्होंने नींव का शिलान्यास कर घर का निर्माण कार्य आरंभ करवाया था। 2 दिसंबर 2020 को वह घर से बटालियन में गए थे।
3 फरवरी 2021 को पाकिस्तानी सेना ने प्रशिक्षित आतंकवादियों को भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करवाने के उद्देश्य से संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए अकारण लघु शस्त्रों, स्वचालित शस्त्रों और मोर्टार से सुंदरबनी सेक्टर में भारतीय चौकियों पर फायरिंग आरंभ कर दी। सिपाही लक्ष्मण की बटालियन उस क्षेत्र की अग्रिम चौकियों में से एक की रखवाली कर रही थी।
भारतीय बलों ने भी इस संघर्ष विराम का प्रत्युत्तर देते हुए प्रचंड फायरिंग की और दोनों ओर से अनेक घंटों तक फायरिंग होती रही। किंतु इस फायरिंग में, सिपाही लक्ष्मण गंभीर रूप से घायल हो गए। शीघ्र ही उन्हें निकट के सैन्य आधार चिकित्सालय में ले जाया गया। अंततः रात्रि में वह वीरगति को प्राप्त हो गए।
जबर हठीलो जाट, लिछमणो झूंझ्यो रण में,
राखी कुळ री आंण, जीतगो बाजी क्षण में,
क्षण में बाजी जीतगौ, अमर इतिहासां छायो,
खेजड़ला रो वीर, काम देसां हित आयो,
कहै शून्य कविराय, झुक्यो है धरती अंबर,
धिन-धिन म्हारा भाग, कमायो नांव जबर।।
- कवि श्रवणदान
शहीद को सम्मान
सिपाही लक्ष्मण राम को उनके साहस, वीरता एवं सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत सेना मेडल दिया गया।
बाहरी कड़ियाँ
गैलरी
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माता के साथ सिपाही लक्ष्मण
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सुंदरबनी में सिपाही लक्ष्मण का निर्माणाधीन स्मारक
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सिपाही लक्ष्मण के अंतिम संस्कार में उमड़ा अपार जनसमूह
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सैन्य वाहन में सिपाही लक्ष्मण के पार्थिव शरीर के साथ सैनिक
संदर्भ
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