Ranod: Difference between revisions
No edit summary |
No edit summary |
||
Line 13: | Line 13: | ||
== History == | == History == | ||
== राणोद == | == राणोद == | ||
[Vijayendra Kumar Mathur|विजयेन्द्र कुमार माथुर]]<ref>[[Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur]], p.786</ref> ने लिखा है.... | |||
राणोद ग्वालियर ज़िला, मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक स्थान है। यह प्राचीन समय में शैवमत का प्रसिद्ध केंद्र था। 10वीं शती ई. के एक अभिलेख से ज्ञात होता है कि राजा [[Avantivarman|अवंतिवर्मन]] के गुरु '[[Purandara|पुरंदर]]' द्वारा एक मठ यहाँ बनवाया गया था तथा उसका विस्तार व्योमशिव ने करवाया था। राणोद को इस अभिलेख में '[[Ranipadra|रानीपद्र]]' कहा गया है। इस अभिलेख में उल्लिखत मठ वर्तमान '[[Khokhaimatha|खोखई मठ]]' है। | राणोद ग्वालियर ज़िला, मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक स्थान है। यह प्राचीन समय में शैवमत का प्रसिद्ध केंद्र था। 10वीं शती ई. के एक अभिलेख से ज्ञात होता है कि राजा [[Avantivarman|अवंतिवर्मन]] के गुरु '[[Purandara|पुरंदर]]' द्वारा एक मठ यहाँ बनवाया गया था तथा उसका विस्तार व्योमशिव ने करवाया था। राणोद को इस अभिलेख में '[[Ranipadra|रानीपद्र]]' कहा गया है। इस अभिलेख में उल्लिखत मठ वर्तमान '[[Khokhaimatha|खोखई मठ]]' है। | ||
== References == | == References == | ||
<references/> | <references/> |
Revision as of 10:17, 14 December 2018
Author: Laxman Burdak IFS (R) |

Rannod (रनोद) is a historical Village in Badarwas Tehsil in Shivpuri District of Madhya Pradesh, India.
Location
It belongs to Gwalior Division . It is located 51 KM towards South from District head quarters Shivpuri. 27 KM from Badarwas. 241 KM from State capital Bhopal. Dagpipari ( 4 KM ) , Pahadakhurd ( 5 KM ) , Tijarpur ( 5 KM ) , Masuri ( 7 KM ) , Moharai ( 7 KM ) are the nearby Villages to Rannod. Rannod is surrounded by Khaniadhana Tehsil towards East , Pichhore Tehsil towards East , Isagarh Tehsil towards South , Kolaras Tehsil towards west . Rannod Pin code is 473781.
Variants
- Ranipadra (रानीपद्र)
History
राणोद
[Vijayendra Kumar Mathur|विजयेन्द्र कुमार माथुर]][1] ने लिखा है.... राणोद ग्वालियर ज़िला, मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक स्थान है। यह प्राचीन समय में शैवमत का प्रसिद्ध केंद्र था। 10वीं शती ई. के एक अभिलेख से ज्ञात होता है कि राजा अवंतिवर्मन के गुरु 'पुरंदर' द्वारा एक मठ यहाँ बनवाया गया था तथा उसका विस्तार व्योमशिव ने करवाया था। राणोद को इस अभिलेख में 'रानीपद्र' कहा गया है। इस अभिलेख में उल्लिखत मठ वर्तमान 'खोखई मठ' है।