Sukhchain

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सुखचैन पटियाला-स्टेट एवं जींद-स्टेट दोनों राजवंश का पुरखा, तिलोका का पुत्र और चौधरी फूल का पौत्र था। जाट इतिहास:ठाकुर देशराज से इनका इतिहास नीचे दिया जा रहा है।

चौधरी फूल के बड़े लड़के तिलोका के दो पुत्र हुए- गुरुदत्तसिंह और सुखचैन। बड़े भाई गुरुदत्तसिंह के वंशज नाभा-स्टेट और छोटे भाई सुखचैन के रियासत जीं, सरदार बड़रूखांबाजेदपुर थे।

अपने पिता के पश्चात् तिलोका को चौधरायत मिली, परन्तु वह इतना होशियार न था कि रियासत की उन्नति करता।

तिलोका का दूसरा बेटा सुखचैन जिसके वंशज जींद स्टेट के राजगान थे, एक जमींदार की हैसियत से था। इसकी शादी मंडी गांव के एक जाट के यहां हुई थी। इसने अपने नाम पर एक गांव भी बसाया था, जो अपने छोटे बेटे बुलाकीसिंह को दिया था। इस तरह के बटवारे के पश्चात् वह अपने बेटे गजपतसिंह के साथ गांव फूल में रहा करता था और सन् 1751 में 75 वर्ष की उम्र में देहान्त हो गया।

सुखचैन का विशेष इतिहास नहीं मिलता। इसके तीन लड़के थे - आलमसिंह, गजपतसिंह और बुलाकीसिंह। आलमसिंह से इस स्टेट का इतिहास पूरा मिलता है।


References


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