Nagapattinam
Author:Laxman Burdak, IFS (R) |
Nagapattinam (नागपट्टिनम्) is a town and district in the Indian state of Tamil Nadu.
Origin
Variants
- Nagapattana नागपट्टन = Negapatam नेगापटम्, जिला राजमहेंद्री, आ.प्र., (AS, p.486)
- Nākappaṭṭinam (नाकपट्टिनम्)
- Nagapatnam
- Negapatam)
History
The town came to prominence during the period of Medieval Cholas (9th–12th century CE) and served as their important port for commerce and east-bound naval expeditions. The Chudamani Vihara in Nagapattinam constructed by the Srivijayan king Sri Mara Vijayattungavarman of the Sailendra dynasty with the help of Rajaraja Chola I was an important Buddhist structure in those times.[1] Nagapattinam was settled by the Portuguese and, later, the Dutch under whom it served as the capital of Dutch Coromandel from 1660 to 1781.[2] In November 1781, the town was conquered by the British East India Company. It served as the capital of Tanjore district from 1799 to 1845 under Madras Presidency of the British.[3] It continued to be a part of Thanjavur district in Independent India. In 1991, it was made the headquarters of the newly created Nagapattinam District.
A majority of the people of Nagapattinam are employed in sea-borne trading, fishing, agriculture and tourism. Kayarohanaswami Temple and Soundararajaperumal Temple, Nagapattinam are the major Hindu pilgrimage sites. Nagapattinam is the base for tourism for Sikkal, Velankanni, Poompuhar, Kodiakkarai, Vedaranyam, Mannargudi and Tharangambadi. Roadways is the major mode of transport to Nagapattinam, while the city also has rail and sea transport.
नागपट्टन=नेगापटम्
विजयेन्द्र कुमार माथुर[4] ने लेख किया है ...नागपट्टिनम (AS, p.486) भूतपूर्व नेगापत्तम, बंदरगाह नगर दक्षिण भारत के पूर्व-मध्य तमिलनाडु राज्य के बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित है। कुछ विद्वानों के मत में पांड्य़ देश की उरगपुर या उरग यही स्थान था। उरगपुर का उल्लेख कालिदास ने रघुवंश 6,59 में किया है, जिसकी टीका करते हुए मल्लिनाथ ने इसे कान्यकुब्ज नदी के तट पर स्थित नागपुर बताया है। (दे. उरगपुर)
चोलकालीन एक अभिलेख से ज्ञात होता है कि राजराज चोल के शासनकाल के 21 वें वर्ष (1005 ई.) में सुवर्ण द्वीप ([[Burma|बर्मा) के शैलेन्द्रनरेश चूड़ावर्मन ने नागपट्टिनम में एक बौद्ध विहार बनवाना प्रारम्भ किया था। राजराज चोल ने इस विदेशी नरेश को अपने राज्य के अंतर्गत बौद्ध-विहार बनवाने की अनुमति दी थी और इस विहार के व्यय के लिए एक गाँव का दान भी किया था। चूड़ावर्मन की मृत्यु के पश्चात् उसके पुत्र तथा उत्तराधिकारी श्रीमारविजयोत्तुंगवर्मन ने इस विहार को पूरा करवाया था। 15 वीं शती तक दो बौद्ध मंदिर नेगापट्टम में थे। इनमें से एक को 1867 में जेसुइट पादरियों ने नष्ट-भष्ट कर दिया और उसके स्थान पर गिरजाघर बनवाया था। (विन्सेंट स्मिथ-अर्ली हिस्ट्री ऑफ इंडिया,पृ. 486)
ग्रीक और यूनानी काल में यूरोप के साथ व्यापार के लिए विख्यात ये प्राचीन बंदरगाह पहले पुर्तग़ाली और बाद में डच उपनिवेश बना। इसके 400 किमी उत्तर में मद्रास (वर्तमान चेन्नई) के विकास के साथ ही इसका महत्त्व कम हो गया। नागपट्टिनम के उद्योगों में जहाज़ मरम्मत, मछली पकड़ना, इस्पात कर्म और धातु के सामान का निर्माण शामिल हैं।
External links
References
- ↑ C. E. Ramachandran; K. V. Raman, Indian History and Culture Society. Aspects of Indian history and culture. Books & Books, 1984. p. 11.
- ↑ W., Francis (2002). Gazetteer of South India, Volume 1. Mittal Publications. p. 161.
- ↑ W. 2002, p. 161.
- ↑ Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.486