Bilvaka
Author:Laxman Burdak, IFS (R) |

Bilvaka (बिल्वक) is a pilgrim mentioned in Mahabharata (XIII.25.13) between Haridwar and Kankhal in Uttarakhand. It is identified with Bilvakeshvara (बिल्वकेश्वर) Mahadeva at Haridwar. Bilva (बिल्व) was famous Naga born to Kashyapa prajāpati of his wife Kadru mentioned in Mahabharata (I.35.12).
Origin
Variants
- Bilvaka बिल्वक (AS, p.632)
- Bilvakeshvara (बिल्वकेश्वर)
- Bilvakeshvar (बिल्वकेश्वर)
- Bilvakeshwar (बिल्वकेश्वर)
Jat clans
History
Bilvakeshvara is the spot where Shiva first revealed himself to Parvati, his future bride.[1]
In Mahabharata
Bilvaka (बिल्वक) (Tirtha) is mentioned in Mahabharata (XIII.25.13)
Bilva (बिल्व) (Naga) is mentioned in Mahabharata(I.35.12)
Mahabharata Anusasana Parva (XIII.25.13) mentions tirtha named Bilvaka (बिल्वक) in verse (XIII.25.13).[2]
Adi Parva, Mahabharata/Mahabharata Book I Chapter 35 gives the names of principal Naga chiefs which includes Bilva (बिल्व) in verse (I.31.12).[3]
बिल्वक
विजयेन्द्र कुमार माथुर[4] ने लेख किया है .....बिल्वक (AS, p.632) एक पौराणिक तीर्थ स्थान का नाम है। महाभारत, अनुशासनपर्व 25, 13 में तीर्थों के वर्णन में इस तीर्थ को हरिद्वार तथा कनखल के निकट माना गया है- 'गंगाद्वारे कुशावर्ते बिल्वके नीलपर्वते, तथा कनखले स्नात्वा धूतपाप्पा दिवं व्रजेत्।' यह स्थान निश्चय ही वर्तमान बिल्वकेश्वर महादेव है, जो हरिद्वार में, स्टेशन की सड़क पर ललतारौ के पुल से दो फलांग दूर है। इस स्थान पर पहाड़ में अनेक प्राचीन गुफ़ाएँ हैं। बिल्ववृक्ष के कारण ही इस स्थान को 'बिल्वक' कहा जाता था।
External links
See also
References
- ↑ God's Gateway: Identity and Meaning in a Hindu Pilgrimage Place By James Lochtefeld, 2010
- ↑ गंगाद्वारे कुशावर्ते बिल्वके नीलपर्वते, तथा कनखले स्नात्वा धूतपाप्पा दिवं व्रजेत (XIII.25.13)
- ↑ करवीरः पुष्पदंष्ट्र एॢकॊ बिल्वपाण्डुकः, मूषकादः शङ्खशिराः पूर्णदंष्ट्रॊ हरिद्रकः (I.31.12)
- ↑ Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.632