Buja Ram Khichar

From Jatland Wiki
Jump to navigation Jump to search

Buja Ram Khichar (1902-1968), from village Bisalwas, Loharu, Bhiwani, Haryana, was a freedom fighter. He was popularly known as Bujja Bhagat.

भगत श्री बूजाराम बिसलवास - स्वतंत्रता सेनानी

आपका जन्म वर्ष 1902 में लोहारू रियासत के ग्राम बिसलवास ज़िला भिवानी (हरियाणा) में हुआ | आप भगत जी के नाम से जाने जाते थे | अनपढ़ होते हुए भी पंजाब में ऍम.एल.ए. बने तथा रियासत लोहारू और अलवर रियासत के संयुक्त ऍम.एल.सी. एवं गांव बिसलवास में तीन बार सर्वसम्मति से सरपंच बने जबकि खीचड़ गोत्र का एक ही वोट था चूंकि स्त्री मर गई थी व एक लड़का व एक लड़की थे | यह विडम्बना ही समझो की इतने पवित्र व्यक्ति के एक लड़का हुआ वह भी मानसिक विक्षिप्त था एवं लड़की अगले घर ससुराल की हो गई | भक्त जी अकेला था किंतु गरीब, मजदूर, किसान उसका बहुत बड़ा परिवार था एवं उनका दुख दर्द भक्त जी का बन गया था | पूंजीपतियों, जागीरदारों तथा लोहारू नवाब की आँखों की किरकिरी बन गये किंतु हिम्मत नहीं हारी | तीन चार बार जेल गये किंतु जनता जनार्दन के सहयोग से उनका मनोबल नहीं टूटा एवं गरीबों व बेसहारा के मसीहा कहलाये |

उनके पास गांव में जो जमीन थी उसमें से कुछ गोशाला लोहारू को दान करदी तथा शेष बची लड़की के नाम करादी| खुद के पास गांव में रहने के लिए एक झोंपड़ी थी | घुटनों तक खद्दर की लंगोटी और नंगे शरीर रहते थे | भोजन के लिए एक थैले में गोंद भरकर गांवों में बेचते थे उससे मेहनत करके स्वाभिमान की रोटी खाते थे और जनता से सम्पर्क कर गरीबों की सहायता करते थे | गरीबों की सहायता करने के कारण लोहारू नवाब ने भक्त जी को यातनाएं देना शुरू कर दिया |

उनकी सेवा भावना, स्वतंत्रता के लिए संघर्ष में योगदान के कारण नेहरु जी, पटेल साहब डा. पट्टाभि सीतारमैया से निसंकोच मिलना जुलना होता था| वे भक्त जी की बड़ी इज्जत करते थे |

अन्तिम दिनों में

अन्तिम दिनों में उनके मस्तिष्क में विक्षिप्तता आ गई थी किंतु बिसलवास का बच्चा बच्चा उनका सम्मान करता था एवं उनकी अन्तिम समय में भी सेवा की | वर्ष 1968 में भक्त जी का स्वर्गवास हो गया |

(शिव विचार तरंगिणी) लेखक शिवराम आर्य - सतनाली का बास जिला महेंद्रगढ़ से लिया गया |

लेखक

लेखक - सुरेन्द्र सिंह भालोठिया

संदर्भ


Back to The Freedom Fighters