Markandeya Ashrama
Author:Laxman Burdak, IFS (R) |


Markandeya Ashrama (मार्कंडेय आश्रम) was originally at the confluence of Sone River and Mahanadi River but has been submerged in Bansagar Submergence area. At present new Ashram has been founded with old idols at Darbar village in Manpur tahsil of Umaria district in Madhya Pradesh. It is first place in Umaria district on Ram Van Gaman Path.
Variants
- Ancient Markandeya Ashrama
- Markandeya Ghat (मार्कण्डेय घाट)
मार्कंडेय आश्रम
मध्यप्रदेश के उमरिया जिले का मार्कंडेय आश्रम पहला आश्रम है, जहां प्रभु श्रीराम वनवास काल के दौरान आए थे. यहां सोन नदी व महानदी का संगम है. इसी संगम स्थल पर बसे मार्कंडेय ऋषि के आश्रम में प्रभु श्रीराम ने आकर संगम के जल में स्नान किया और भगवान महादेव के प्राचीन शिवलिंग की अराधना की थी.[1]
सरकार की बाणसागर परियोजना पूरी होने के कारण प्राचीन मार्कंडेय आश्रम बाणसागर के जलविप्लव में विलीन हो चुका है. आज के 25 वर्षों पूर्व यहां के दरबार गांव के स्थानीय लोगों ने एक भव्य मंदिर का निर्माण करके डूबे हुए आश्रम में स्थापित मार्कंडेय बाबा की आदम कद प्रतिमा के अलावा, प्राचीन व अलौकिक हनुमानजी, शिवलिंग आदि कईं मूर्तियों को स्थापित कर रखा है. संलग्न वीडियो में आप दरबार गांव का वह मंदिर भी देख सकते हैं. इसके अलावा सोन नदी व महानदी का संगम और मार्कंडेय ऋषि का आश्रम स्थल भी आप इस वीडियो में देख सकते हैं.[2]
उमरिया जिले में राम वनगमन मार्ग पर स्थित स्थान

उमरिया. विंध्य मैकल पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी अमरकंटक से निकलने वाली दो नदियों सोन एवं जोहिला के संगम स्थल पर स्थित दृश्य भगवान राम के वन गमन का मार्ग है जो लोगों की आस्था का केंद्र तो है लेकिन उपेक्षा का शिकार भी हैं. पौराणिक मान्यता के मुताबिक चित्रकूट से सतना होते हुए भगवान राम उमरिया के मार्कण्डेय आश्रम पंहुचे थे. जहां से वह बांधवंगढ़ के लिए रवाना हुए और रात्रि विश्राम कर दूसरे दिन आगे बढ़े और सोन जोहिला नदी के संगम में अपने पिता दशरथ का श्राद्ध किया. उसी क्षण के बाद इस स्थल का नाम दशरथ घाट हो गया. तब से लेकर लोग यहां आज तक आस्था की डुबकी लगाते हैं लेकिन घने जंगल और पगडंडियों से होकर यहां तक पंहुचने में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हालांकि प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में स्थित राम वनगमन मार्ग को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित करने के फैसले से लोगों में उत्साह है. राम वनगमन समय के उमरिया जिले में तीन मुख्य केंद्र हैं जिसमे पहला मार्कण्डेय आश्रम है जो अब बाणसागर जलाशय बन जाने के बाद डूब में आ चुका है. दूसरा बांधवंगढ़ का किला और तीसरा दशरथ घाट संगम. जानकारों की माने तो प्रभु श्री राम ने अपने भाई लक्ष्मण को लंका में निगरानी रखने के लिए यह किला दान में दिया था और इसका निर्माण सेतुबन्धु रामेश्वरम का निर्माण करने वाले नल नील ने किया था. किवदंती है कि बांधवंगढ़ के पर्वत की ऊंचाई इतनी ज्यादा थी कि लंका का किला ठीक से दिखाई नही देता था. जिसके चलते लक्ष्मण ने अपने पैर बांधवंगढ़ के ऊपर रखकर इसे छोटा कर दिया था. भूगोल के जानकार आज भी बांधवंगढ़ के पहाड़ को किसी फुटप्रिंट जैसे होना बताते हैं. बांधवंगढ़ के किले में स्थित रामजानकी मंदिर आज भी देश भर के लोगो की आस्था का केंद्र है. जहां हर जन्माष्टमी लाखों लोग दर्शन करने आते हैं. प्रदेश सरकार के द्वारा राम वनगमन मार्ग को चिन्हित कर विकसित करने से जिले में उपेक्षित पड़े राम वनगमन मार्ग के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार संभव हो सकेगा. वहीं लोगों के जेहन में धुंधली होती जा रही राम वन गमन की तस्वीर भी साफ होगी.[3]
सरसी आइलैंड: तीन जिलों की सीमा में बना है

उमरिया का इटमा और मैहर जिले का मार्कण्डेय घाट तैयार हो चुके हैं और शहडोल का सरसी प्रस्तावित है. बाणसागर के बैकवॉटर एरिया में स्थित टापू में बना सरसी आईलैण्ड तीन जिलों की सीमा को जोड़ता है. तैयार होने के साथ ही यह चर्चा में आया और अब लोग इसका लुत्फ भी उठा सकेंगे. शहडोल, उमरिया और मैहर जिले की सीमा को जोडऩे वाले बाणसागर बांध में बने इस आईलैण्ड तक पहुंचने के लिए अलग-अलग मार्ग हैं. फिलहाल यहां पहुंचने के लिए कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन आने वाले समय में व्यवस्थित मार्ग व आगावामन बढऩे के साथ ही यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा. चारों तरफ अथाह पानी के बीच टापू में बना यह पर्यटन स्थल रोमांच से भरपूर है. पर्यटकों की सुविधाओं का यहां विशेष ध्यान रखा गया है. यहां पर्यटकों के रुकने, भोजन, बोटिंग, बच्चों के खेलने के साथ प्रकृति के अद्भुत नजारे का लुत्फ उठाने की समुचित व्यवस्था है.
इन मार्गों से पहुंच सकते हैं सरसी आइलैण्ड: जानकारों की माने तो सरसी आईलैण्ड तक पहुंचने के लिए तीन अलग-अलग मार्ग हैं.
- इनमें सबसे आसान रास्ता सतना मैहर से रामनगर होते हुए मार्कण्डेय घाट तक का है.
- इसके अलावा कटनी से उमरिया होकर आने वाले पर्यटक बांधवगढ़, पनपथा, चंसुरा होते हुए झालघाट से इटमा घाट पहुंच सकते हैं.
- इधर अनूपपुर तरफ से शहडोल से ब्यौहारी, निपनिया, पपौंध होते हुए सरसी घाट तक पहुंचा जा सकता है. शहडोल से सरसी घाट पहुंचने में थोड़ा बहुत भटकाव व घुमाव अवश्य है, लेकिन जगह-जगह लगे संकेतक बोर्ड की मदद से यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है.
बांधवगढ़ टाइगर रिजव, मैहर शारदा माता मंदिर और इधर ब्यौहारी से लगे संजय टाइगर रिजर्व के बीच बने सरसी आईलैण्ड को पर्यटन स्थल के रूप में अपनी विशेष पहचान बनाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा. जानकारों की माने तो बांधवगढ़, संजय टाइगर रिजर्व घूमने आने वालों व मैहर शारदा माता मंदिर के दर्शन के लिए आने वाले लोग सहज ही यहां खिंचे चले आएंगे. इन पर्यटन व धार्मिक स्थलों से सरसी आईलैण्ड की दूरी भी ज्यादा नहीं है.
Source - www.patrika.com Dec 14, 2024, by Kamlesh Rajak