Saidpur Bulandshahr

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Note - Please click → Saidpur for details of similarly named villages at other places.


Saidpur on Map of Bulandshahr district
Saidpur Village

Saidpur (सैदपुर) is a village in Siana tahsil of district Bulandshahr in Uttar Pradesh.

Location

Saidpur is in opposite direction to Bhatona from Gulaothi about 12 miles. Saidpur is a Village in Bhawan Bahadur Nagar Block in Bulandshahr District of Uttar Pradesh State, India. It belongs to Meerut Division . It is located 28 KM towards North from District head quarters Bulandshahr. 2 KM from Bhawan Bahadur Nagar. 418 KM from State capital Lucknow. Saidpur Pin code is 203411 Nerby villages: Karkaura ( 2 KM ) , Sahera ( 2 KM ) , Anehda ( 3 KM ) , Nirsukha ( 3 KM ) , Partapur ( 4 KM ) are the nearby Villages to Saidpur. Saidpur is surrounded by Gulaothi Block towards west , Hapur Block towards west , Syana Block towards East , Lakhaothi Block towards South.

This Place is in the border of the Bulandshahr District and Ghaziabad District. Ghaziabad District Simbhawali is North towards this place .

The Founders

Jat Gotras

Population

It has a population around 50000 mainly Sirohi Jats (about 90%). It was a Jat state too of Dalal gotra Jats. It was main village of Varik Khap.[2]

History

For history see - Kuchesar or Dalal or Varik

Monuments

Saidpur War Memorial
  • दादी का स्थान - इस स्थान पर सिरोही गोत्र की उमराव कंवर सती हुई थी.
  • मिलेट्री हिरोज मेमोरियल इंटर कॉलेज - विभिन्न युद्धों में शहीद हुये सैनिकों की यादगार में यह कालेज स्थापित किया गया है. यहां के नवयुवकों को देश के प्रति एक अलग साहस जगाता है।
  • शहीद स्मारक स्थल - इस स्मारक में गाँव के अभी तक विभिन्न युद्धों में शहीद हुये सैनिकों की नामावली दी गई है.
  • शहीद सुरेंद्रसिंह स्मारक - 1999 कारगिल युद्ध में यहां के शहीद सुरेंद्रसिंह दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे. उनकी याद में शहीद स्मारक बनाया गया है और मूर्ति स्थापित की गई है.

इतिहास

ठाकुर देशराज लिखते हैं कि सेहरा, सैदपुर के जाटों की बुलन्दशहर में अच्छी इज्जत है। सरदार रतनसिंह, ठाकुर शादीराम और ठाकुर झण्डासिंह ने गदर में सरकार की बड़ी सहायता की थी। [3]

फौजियों का गांव सैदपुर बुलंदशहर

सैदपुर बुलंदशहर शहादत का गवाह है। अंगेजी काल से लेकर कारगिल युद्ध तक इस गांव में शहीदों की लंबी फेहरिस्त है। वतन पर जान तक कुर्बान करने का कोई जज्बा किसी गांव में भरा था, तो वह यही गांव है। यहां शहीदों की मजारों पर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक आते रहे हैं। यह शूरमाओं का ऐसा तीर्थ है, कि विधवाओं के आंसुओं से यह गांव दहाड़े मारकर रोता रहा है।

देश की राजधानी दिल्ली से करीब 90 किमी और बुलन्दशहर जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर बसे गांव सैदपुर में शौर्य, साहस और मातृभूमि के लिए जान तक न्यौछावर करने की परंपरा पुरानी है। यहां हर परिवार फौजी का परिवार है। एक दूसरे-तीसरे घर में शहीदों के अदम्य साहस की महागाथा मिलेगी। अंग्रेजी हुकूमत काल की बात करे या आजादी के बाद की। इस गांव के जवानों ने शौर्य, वीरता एवं शहादत की ऐसी इबारत लिखी है। कि इस गांव को फौजियों के गांव के नाम से जाना जाता है।

पराक्रम का सिलसिला विश्वयुद्ध वर्ष 1914 से शुरू हुआ: पिछले सौ साल के इतिहास की बात करें तो पराक्रम का सिलसिला प्रथम विश्वयुद्ध वर्ष 1914 से शुरू होता है। इसमें अकेले इस गांव से 155 सैनिक जर्मनी गए थे, जिनमें से 29 शहीद हो गए और 100 जवान वहीं बस गए। जहां निवास किया उसका नाम जाटलैंड रखा। गाँव में पहले एक पुराना शहीद स्मारक स्टोन था जिस पर उल्लेख था कि इस गाँव से प्रथम विश्वयुद्ध में 52 फौजी शहीद हुये थे.

1962 के भारत-चीन युद्ध हो या फिर 1965 और 1971 के युद्ध में इस गांव के सैनिकों ने बहुत आहुति दी थी। नोसेना, वायुसेना और मिलेट्री में भर्ती होना यहां के खून में ही बसा है। सैदपुर ने हर लड़ाई में आहुति दी है। यह गांव 171 शहीदों की लम्बी फेहरिस्त का गवाह है।

1965 की लड़ाई में सैदपुर के सुखबीर सिंह सिरोही को परमवीर चक्र मिला था। इसके अलावा सैदपुर की आंचल में शौर्य एवं साहस के लिए देश-प्रदेश से मिले दर्जनों मेडल है।

1971 के युद्ध में विजय सिरोही व मोहन सिरोही एक ही दिन शहीद हुए थे।

केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्री रहते इंदिरा गांधी भारत-पाक युद्ध में शहादत देने वाले लेफ्टिनेंट सुखबीर सिंह सिरोही का अस्थि कलश लेकर स्वयं पहुंची थीं। सैदपुर गांव के बीचों बीच शहीद स्तंभ यहां की गौरव गाथा का बखान करता है। तो वहीं मेन रोड पर मिलेट्री हिरोज मेमोरियल इंटर कॉलेज यहां के नवयुवकों को देश के प्रति एक अलग साहस जगाता है।

गांव में फौजियों की करीब 250 विधवाएं है: शहीद स्तंभ पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व इंदिरा गांधी व चौधरी चरण सिंह आ चुके हैं। इनके अलावा प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए बाबू बनारसी दास, रक्षा मंत्री रहते मुलायम सिंह यादव, राजा बच्चू सिंह और चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत यहां आ चुके हैं। शहीद और सेवानिवृत्त मिलाकर सैदपुर में फौजियों की करीब 250 विधवाएं है। पतियों ने अगर सीमा पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए प्राण न्यौछावर किए तो पत्नियां भी उनके बलिदान में सहभागी बनीं।

1999 कारगिल युद्ध में यहां के शहीद सुरेंद्र सिंह दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुए थे। जब उनका शव तिरंगे में लिपटा हुआ पहुंचा तो शहीद को नम आँखों से विदाई देने एक लाख से ज्यादा का जन सैलाब था।

सैदपुर के शहीदों की सूची

Notable persons

  • Sukhvir Singh Sirihi - Martyr and Awardee of Param Veer Chakra in Indo-Pak War-1965
  • Vijay Singh Sirohi - Martyr of Indo-Pak War-1971
  • Mohan Singh Sirohi - Martyr of Indo-Pak War-1971
  • Surendra Singh Sirohi - Martyr of Kargil War-199
  • Dharm Veer Sirohi - DCF (Ret.), Rajasthan, Mob: 9784874805, Address: 191, Girnar Colony, Gandhi Path, Vaishalinagar, Jaipur

External link

References


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