Ramapura

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Author:Laxman Burdak, IFS (Retd.)

Ramapura (रामपुर) is a city and district in Uttar Pradesh. Rampur district is a part of Moradabad division.

Origin of name

Originally it was a group of four villages named Kather, the name of Raja Ram Singh. The first Nawab proposed to rename the city Faizabad. But many other places were known by the name Faizabad so its name was changed to Mustafabad alias Rampur.[5]

Variants

Location

Rampur, located between longitude 79°05' E and latitude 28°48' N, is in Moradabad Division of Uttar Pradesh, India. It is surrounded by district Udham Singh Nagar in north, Bareilly in east, and Moradabad in west and Badaun in south.

History

As per medieval history, Rampur was the part of the Delhi region, and was divided between Badaun and Sambhal districts. Being situated on upperside of Rohilkhand, it was known by the name Kather and was ruled by Katheria Rajputs. The Katheria Rajputs resisted islamic rule for about 400 years, fighting the sultans of Delhi and later with the Mughals. They went to repeated battles with Nasiruddin Mahmud in 1253, Ghiyas ud din Balban in 1256, Jalal-ud-din Khalji in 1290, Firuz Shah Tughlaq in 1379 & Sikandar Lodi in 1494.

Later, in the beginning of the Mughal period, the capital of Rohilkhand was changed from Badaun to Bareilly and hence the importance of Rampur increased.[5]

रामपुर उत्तर प्रदेश

रामपुर उत्तर प्रदेश राज्य का एक ज़िला है। रामपुर नगर उपर्युक्त ज़िले का प्रशासनिक केंद्र है तथा कोसी के बाएँ किनारे पर स्थित है। यह प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थान भी है, जिसका महात्मा बुद्ध से निकट सम्बन्ध रहा है। भगवान बुद्ध के परिनिर्वाण के पश्चात् उनके अस्थि अवशेषों के आठ भागों में से एक पर एक स्तूप बनाया गया था, जिसे 'रामभार स्तूप' कहा जाता था। संभवतः इसी स्तूप के खंडहर इस स्थान पर मिले हैं। किंवदंती है कि इसी स्तूप से नागाओं ने बुद्ध का दांत चुरा लिया था, जो लंका में 'कांडी के मंदिर' में सुरक्षित है। कुछ विद्वान् रामपुर को 'रामगाम' मानते हैं। रामपुर का उल्लेख 'बुद्धचरित' (28, 66) में है, जहाँ रामपुर के स्तूप का विश्वस्त नागों द्वारा रक्षित होना कहा गया है। कहा जाता है कि इसी कारण अशोक ने बुद्ध के शरीर की धातु अन्य सात स्तूपों की भांति, इस स्तूप से प्राप्त नहीं की थी।[1]

रामपुर की स्थापना नवाब फ़ैजुल्लाह ख़ान ने की थी। उन्होंने 1774-1794 ई. तक यहाँ शासन किया। 'नवाबों की नगरी' कहे जाने वाले रामपुर में उत्तरी रेलवे का स्टेशन है। रामपुर का चाकू उद्योग काफ़ी प्रसिद्ध है। चीनी, वस्त्र तथा चीनी मिट्टी के बरतन के उद्योग भी नगर में हैं। शिक्षा के अंतर्गत यहाँ अरबी भाषा का एक महाविद्यालय है। 'रामपुर क़िला', 'रामपुर राजा पुस्तकालय' और 'कोठी ख़ास बाग़' रामपुर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिने जाते हैं। रामपुर का कुल क्षेत्रफल 2,367 वर्ग किलोमीटर है। लगभग 200 वर्ष पुरानी, रुहेलखंड की एक रियासत का नाम भी रामपुर था, जो उत्तर प्रदेश में विलीन हो गयी थी। इसके संस्थापक रुहेले थे। [2]

प्रसिद्ध चीनी यात्री युवानच्वांग ने रामपुर के क्षेत्र का नाम 'गोविषाण' लिखा है।[3]

References