Ratau

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Location of Ratau in Nagaur district

Ratau (रताऊ) (Rataoo) is a large village in Ladnu tehsil of Nagaur district in Rajasthan.

Location

PIN Code of the village is: 341303. It is situated 42km away from Ladnu town and 132km away from Nagaur city. Being a large village, Ratau has its own gram panchayat. Nandwan, Khamiyad and Dhurila are some of the neighbouring villages.

History

From the history of Bidyasar gotra we know that they are the descendants of king Bidya Datta (बिद्यादत्त) who ruled over Ujjain during 9th century. It is said that the ruling family of Mysore state is "Vadyar" by gotra and are the descendant of king Bidya Datta.

In Rajasthan, they first came to Runicha (Jaisalmer) and then to Rarod (Tah. Bhopalgarh in Jodhpur) and Rataoo (Tahsil- Ladnu in Nagaur) in 12th century and occupied the position of village Chaudhary. His son Kanwsi, a great devotee of "Goddess Dadhimati" of Goth Mangalod later on changed the name of Dhasunda to Khiyala. Bidyasar Choudhary of Khiyala used to collect land revenue on behalf of Delhi throne for three decades , before Jodhpur state was carved out.

Jat gotras

  • Badiasar (बिडियासर)
  • Dhaka,
  • Ralia : रताऊ में रलिया परिवार में लगभग 40 घर है. रताऊ के रलिया रातंगा ओर धरणा से आये हुए है
  • Sakh (साख)
  • Gaina (गैना)
  • Bhakar (भाकर)
  • Pachar (पचार)
  • Jewalia (जेवलिया)

बडियासर और काला लोगों की लड़ाई

इतिहासकार डॉ पेमाराम[1] ने इस घटना का विस्तार से वर्णन किया है:

कहते हैं, पहले बडियासर रताऊ में रहते थे और खिंयाला गाँव को धसूंडा कहते थे, जहाँ काला गोत्र के जाट रहते थे. यहाँ सात काला भाईयों के बीच एक बहिन थी, जिसका विवाह रताऊ के बडियासर के साथ हुआ था. कुछ दिनों बाद वह बडियासर अपनी ससुराल धसूंडा आकर रहने लग गया था. काला भाई इस बडियासर बहनोई को बेगार में सुल्तान की रकम जमा कराने दिल्ली भेज देते थे. बार-बार जाने से दिल्ली सुल्तान के यहाँ चौधरी के रूप में बडियासर का नाम अंकित हो गया था और चौधरी की पाग उसको मिलने लग गयी थी. काला लोगों को जब पता चला कि गाँव की चौधर बडियासर बहनोई के हाथ चली गयी है तो उन सात काला भाईयों ने बहिन को रातिजका में बुलाकर पीछे से बहनोई की हत्या कर दी.

उस समय बडियासर की पत्नी गर्भवती थी. अपने पति की हत्या सुनकर वह विलाप करने लगी, तब गोठ मांगलोद की दधिमती माताजी ने उसे परचा दिया कि बिलोने में से छाछ उछाल दे, जितने छींटे उछलेंगे, उतने ही बडियासर पैदा हो जायेंगे और तुम्हारे गर्भ से जो पुत्र पैदा होगा, वह कालों से वैर लेगा. बाद में गर्भ से कांवसी नामक लड़का पैदा हुआ. बड़ा होने पर अपने पिता की मौत का वृत्तांत जानकर वह अपने चाचा के साथ दिल्ली सुल्तान के पास गया और वहां से मदद के लिए दिल्ली सुल्तान की फ़ौज ले आया . कालों पर बडियासर लोगों ने चढ़ाई कर दी. खिंयाला के तालाब के पास लडाई हुई जिसमें बहुत से बडियासर मारे गए, परन्तु लड़ाई में कालों से पूरा वैर लिया गया और उस इलाके में एक भी काला को नहीं छोड़ा. सारे काला या तो मारे गए या इलाका छोड़कर भाग गये. कालों से सारा इलाका खाली हो गया. इसके बाद बडियासर लोगों ने यह तय किया कि भविष्य में कोई भी बडियासर काला जाटों के यहाँ न तो पानी पिएगा, न खाना खायेगा और न उनसे शादी-विवाह का व्यवहार करेगा. इस बात की जानकारी होने पर बडियासर गोत्र के जाट अभी तक इन बातों का पालन करते हैं. फ़ौज के हमले के दौरान घोड़ों के खुरों से जो 'खंग' उडी थी इससे इस गाँव का नाम बदलकर धसुंडा से खिंयाला हो गया था.

कालों से लड़ाई में बहुत से बडियासर मारे गए थे, उन सब की देवलियां खींयाला गाँव के तालाब के किनारे बनी हुई है. इसमे काँवसी का लड़ाई के दौरान सर कट जाने के बाद भी धड से लड़ते हुए वह खिंयाला के जंगल में गिरे थे. उनका स्थान आज भी खिंयाला के जंगल में बना हुआ है, जहाँ उनकी मूर्ती लगी हुई है और उस पर मंदिर बना हुआ है. बडियासर गोत्र के लोग उस स्थान को 'दादोसा का मंदिर' कहकर पुकारते हैं. खींयाला के कांवसी की देवली पर वि. 1383 संवत (1326 ई.) मीती मिंगसर सुदी 4 की तिथि अंकित है और उसके पौत्र नरसी की देवली पर वि. संवत 1405 (1348 ई.) की तिथि अंकित है जो इस बात को दर्शाता है कि बडियासर और काला लोगों के बीच कई वर्षों तक झगडा चला था.

बदला लेते समय ढाढी ने बडियासरों के पक्ष में ढोल बजाने से इंकार कर दिया था, इस पर बडियसरों ने तय किया था कि भविष्य में ढाढी उनका ढोल नहीं बजयेगा. इसके बाद बडियसरों के शुभ अवसरों पर ढोली ही ढोल बजाता है.

Population

According to Census-2011 information:

With total 1187 families residing, Ratau village has the population of 7194 (of which 3661 are males while 3533 are females).[2]

Notable person

  • Prema Ram Badiasar- From Ratau, Block BJP Upadhyaksh.[3]
  • Moola Ram Bidiyasar is a Martyr of Kargil War from Rajasthan. He belonged to village Kathoti in Jayal tehsil of Nagaur district in Rajasthan. He was born at village Ratau in Nagaur district but his family moved to Kathoti. He was in Unit-04 Jat Regiment of Indian Army. He died on 15 May 1999, in Kargil war fighting with bravery in war with Pakistan Army. His father's name is Raghunat Ram and mother's name is Rameshwari.
  • जैया राम, रताऊ - मारवाड़ जाट कृषक सुधार सभा की प्रबंधकारिणी और कार्यकारिणी में रहकर आप ने जाट जाति की सेवा करके अपने को कृतार्थ किया है। [4]
  • जोरा राम मास्टर, रताऊ- मारवाड़ जाट कृषक सुधार सभा की प्रबंधकारिणी और कार्यकारिणी में रहकर आप ने जाट जाति की सेवा करके अपने को कृतार्थ किया है। [5]
  • हरफूल पचार: डीडवाना गोलीकांड मेंं स्व. जीवण राम के साथ जिनको गोली लगी वो स्व. हरफूल पचार रताऊ के ही निवासी थे।
  • Hanuman ram ji,
  • Shivnath ram ji,
  • Luna Ram
  • Oma Ram
  • Bhanwara Ram ji,
  • Ramniwas ji

External Links

References

  1. (डॉ पेमाराम, राजस्थान के जाटों का इतिहास पृ.24-25)
  2. Web-page of Ratau village at Census-2011 website
  3. 'Jat Privesh', June 2015,p. 23
  4. Thakur Deshraj: Jat Jan Sewak, 1949, p.209
  5. Thakur Deshraj: Jat Jan Sewak, 1949, p.210

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