Sauvira

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Kingdoms of late Vedic India

Sauvira (सौवीर) is a kingdom mentioned in the epic Mahabharata (V.72.14), (VI.10.52),(V.19.19),(V.72.14),(VI.18.13), (VI.20.10),(VI.112.108).

Founder

The kingdom of Sauvira was founded by Prince Suvira, one of the sons of Sivi. The neighboring kingdoms of Madra, Kekaya, and Sindhu belonged to Madraka, Kekaya, and Vrsadarbh, the other three sons of Sivi.

Ancestry of Suvira

YayatiAnuSabhanaraKalanaraJanamejayaMaha ShalaMahamanas → (1.Ushinara + 2.Titiksha)

Jat clans

Mention by Panini

Sauvira (सौवीर) is mentioned by Panini in Ashtadhyayi. [1]


Sauvira (सौवीर), a sour drink, is mentioned by Panini in Ashtadhyayi. [2]

History

V. S. Agrawala[3] writes that Ashtadhyayi of Panini mentions janapada Sauvīra (सौवीर) (IV.1.148). Panini mentions Sauvira and gives valuable social history of the region.It was home of many Gotras - Phāṇṭahṛiti, Mimata, Bhāgavitti, Tārṇabindava, Akaśapeya, Yamunda and Suyāmā. Bhāgavitti may be identified with the present Bugti tribe on the northern border of Sind. Panini mentions Śarakarā (modern Sukkur on the Indus) as a town (IV.2.83). Pali literature mentions Rauruka (modern Rori in Upper Sind as the capital of Sauvira.


V. S. Agrawala[4] mentions Vishayas known to Panini which includes - Sauvira (सौवीर).

In Mahabharata

According to the epic, Jayadratha was the king of the Sindhus, Sauviras and Sivis, having conquered Sauvira and Sivi, two kingdoms close to the Sindhu kingdom. Jayadratha was an ally of Duryodhana and the husband of Duryodhana's sister Dussala. The kingdom of Sauvira is also stated to be close to the Dwaraka and Anarta kingdoms.

Modern equivalents

The Sauvira people mentioned in the Mahabharata may be the etymological origin of the name of the modern-day Saraiki people, according to Ahmad Hassan Dani. [5]Persian scholar Al-Beruni considered Sauvira to represent southwest Punjab, including Multan, Mithankot and adjacent areas in the region of the confluence of the Indus river with other rivers of Punjab in modern Pakistan.

सौवीर

सौवीर (p.998): विजयेन्द्र कुमार माथुर [6] ने लेख किया है .... गुजरात, दक्षिणी सिंध (पाकिस्तान) तथा दक्षिणी पंजाब के प्रदेश का प्राचीन नाम. महाभारत काल में दक्षिण सिंधु देश को सौवीर कहा जाता था. सिंधु राज जयद्रथ को सौवीर का राजा भी कहा गया है. सभा पर्व 51 में सिंधु देश के घोड़ों तथा सौवीर के हाथियों का युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में उपादन [p.999]: के रूप में दिए जाने का साथ-साथ ही उल्लेख है-- '........'

विष्णु पुराण में भी सौवीर और सिंधु-निवासियों का साथ ही वर्णन है--'सौवीरा: सैंधवा: हुणा: शालवा: कौशलवासिन:' रोरुक नगर(वर्तमान रोरी, सिंधु पाकिस्तान) सौवीर में ही स्थित था (दे. दिव्यावदान, पृ. 545). यहां के राजा रुद्रायण का दिव्यावदान में उल्लेख है. मिलिंदपन्हो(सैक्रेड बुक्स ऑफ द ईस्ट 36, पृ. 269) से सूचित होता है कि सौवीर में सिंध के समुद्र तट का प्रदेश भी सम्मिलित था (सिंधु देश, सिंधु नदी के पश्चिम की अंतर्भूमि का नाम था). सौवीर में समुद्र तट के पश्चिम की ओर मुल्तान तक का प्रदेश भी शामिल था जैसा कि अलबेरूनी के साक्ष्य (1,302) से सिद्ध होता है. अलबरूनी ने सौवीर को मुल्तान और जहरावार प्रदेश का नाम बताया है. उसकी सूचना का स्रोत वाराह्मीहिर संहिता जान पड़ती है. जैन ग्रंथ प्रवचन-सारद्वार में इस देश की राजधानी का नाम वीतभय दिया हुआ है. एक अन्य सूत्र व्याख्या-प्रज्ञप्ति में यह नाम वीतहव्य है जो राजा केशी के समय में बिल्कुल उजाड़ हो गया था.

शक क्षत्रप रुद्रदामन के गिरनार अभिलेख में उसके द्वारा सौवीर को विजित किए जाने का उल्लेख है-- '......' (देखें गिरनार). अग्नि पुराण में देविका नदी (जो मुल्तान या मूलस्थान के निकट बहती थी) का संबंध सौवीर से बताया गया है--- 'सौवीरराजस्यपुरा मैत्रेयोभूत पुरोहित:, तेन चायतनं विष्णो: कारितं देविकातटे'-- अग्नि अध्याय 200. इसे अलबेरुनी द्वारा वर्णित तथ्य प्रमाणित होता है. ग्रीक लेखको सौवीर को सोफीर या ओफ़ीर लिखा है. पणिनि के अनुसार सौवीर के गोत्रों में उत्पन्न व्यक्तियों के नामों में 'आयानि' प्रत्या लगता था जैसे मिमित में उत्पन्न मैमतायानि, फांटाहृत में उत्पन्न फांटाहृतायनि. सिंधी लोगों के नामों में अभी तक 'आनी' शब्द लगता है जैसे कृपलानी, वास्वानी आदि.

देविका नदी

विजयेन्द्र कुमार माथुर[7] ने लेख किया है ... 2. देविका नदी (AS, p.451) = स्कंदपुराण के अनुसार (प्रभास खंड 278) यह नदी 'मूलस्थान' (मुल्तान, दक्षिणी पाकिस्तान) के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर के निकट बहती थी। अग्नि पुराण 200 में इस नदी को सौवीर देश के अंतर्गत बताया गया है- 'सौवीरराजस्य पुरा मैत्रेया भूत पुरोहित: तेन चायतनं विष्णो: कारितं देविका तटे।' अर्थात् "सौवार नरेश के मैत्रेय नामक पुरोहित ने देविका तट पर विष्णु का देवालय बनवाया था।

महाभारत, वनपर्व के अंतर्गत तीर्थ यात्रा प्रसंग में इस नदी का उल्लेख है। भीष्मपर्व 9, 16 में इसका अन्य नदियों के साथ उल्लेख है- 'नदी वेत्रवती चैव कृष्णवेणां च निम्नगाम्, इरावती वितस्तां च पयोष्णी देविकामपि'।

[p.452]: महाभारत, अनुशासनपर्व 25, 21 में इस नदी में स्नान करने से मरने के बाद सुंदर शरीर की प्राप्ति बताई गई है- देविकायामुपस्पृश्य तथा संदरिकाह्रदे अश्विन्यां रूपवर्चस्कं प्रेत्य वैलभते नर:'।

पाणिनि ने देविका तट के धानों का उल्लेख किया है। (अष्टाध्यायी 7,3,1) विष्णु पुराण 2,15,6 में देविका के तट पर 'वीर नगर' नामक स्थान का उल्लेख है। कुछ विद्वानों के मत में देविका पंजाब की वर्तमान देह नदी है, जो रावी में मिलती है।

References

  1. V. S. Agrawala: India as Known to Panini, 1953, p.37, 44, 50, 425
  2. V. S. Agrawala: India as Known to Panini, 1953, p.110
  3. V. S. Agrawala: India as Known to Panini, 1953, p.50
  4. V. S. Agrawala: India as Known to Panini, 1953, p.498
  5. Dani, Ahmad Hassan (1982). "Sindhu-Sauvira: A glimpse into the early history of Sind". In Khuhro, Hameeda. Sind Through the Centuries. Karachi: Oxford University Press. pp. 35–42. ISBN 978-0195772500.
  6. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.
  7. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.451

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