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25 September
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Chet Ram Bhukar

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Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Cheta Ram Bhukar (born:1893) (चेताराम भूकर) was a martyr and Hero of Shekhawati farmers movement. He belonged to village Gothra Bhukaran. He was killed by the Jagirdars on 25.4.1935 at village Kudan in Sikar district of Rajasthan.[1][2]

जीवन परिचय

जाट जन सेवक

ठाकुर देशराज[3] ने लिखा है ....शहीद चौधरी चेताराम जी - [पृ.317]: चौधरी चेताराम जी का जन्म संवत 1950 विक्रमी (1893 ई.) में गोठड़ा में हुआ था। आप भूकर गोत्र के चौधरी सामूराम जी के पुत्र थे। आपने अपने पीछे दो संताने छोडी हैं। एक दिन प्रातः आपने सुना कि सीकर ने कूदन पर सैकड़ों हथियारबंदों के साथ चढ़ाई कर दी है तो आप दौड़ कर कूदन पहुंचे। एक टीले के पास आपने अपने साथियों को मोर्चे पर जमाया। यही आप गोली का निशाना हुये। और सदा के लिए अपना नाम अमर कर के इस संसार से चल बसे।

पाठ्यपुस्तकों में स्थान

शेखावाटी किसान आंदोलन ने पाठ्यपुस्तकों में स्थान बनाया है। (भारत का इतिहास, कक्षा-12, रा.बोर्ड, 2017)। विवरण इस प्रकार है: .... सीकर किसान आंदोलन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सीहोट के ठाकुर मानसिंह द्वारा सोतिया का बास नामक गांव में किसान महिलाओं के साथ किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में 25 अप्रैल 1934 को कटराथल नामक स्थान पर श्रीमती किशोरी देवी की अध्यक्षता में एक विशाल महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया। सीकर ठिकाने ने उक्त सम्मेलन को रोकने के लिए धारा-144 लगा दी। इसके बावजूद कानून तोड़कर महिलाओं का यह सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में लगभग 10,000 महिलाओं ने भाग लिया। जिनमें श्रीमती दुर्गादेवी शर्मा, श्रीमती फूलांदेवी, श्रीमती रमा देवी जोशी, श्रीमती उत्तमादेवी आदि प्रमुख थी। 25 अप्रैल 1935 को राजस्व अधिकारियों का दल लगान वसूल करने के लिए कूदन गांव पहुंचा तो एक वृद्ध महिला धापी दादी द्वारा उत्साहित किए जाने पर किसानों ने संगठित होकर लगान देने से इनकार कर दिया। पुलिस द्वारा किसानों के विरोध का दमन करने के लिए गोलियां चलाई गई जिसमें 4 किसान चेतराम, टीकूराम, तुलसाराम (तीनों गोठड़ा के) तथा आसाराम (अजीतपुरा) शहीद हुए और 175 को गिरफ्तार किया गया। हत्याकांड के बाद सीकर किसान आंदोलन की गूंज ब्रिटिश संसद में भी सुनाई दी। जून 1935 में हाउस ऑफ कॉमंस में प्रश्न पूछा गया तो जयपुर के महाराजा पर मध्यस्थता के लिए दवा बढ़ा और जागीरदार को समझौते के लिए विवश होना पड़ा। 1935 ई के अंत तक किसानों के अधिकांश मांगें स्वीकार कर ली गई। आंदोलन नेत्रत्व करने वाले प्रमुख नेताओं में थे- सरदार हरलाल सिंह, नेतराम सिंह गौरीर, पृथ्वी सिंह गोठड़ा, पन्ने सिंह बाटड़ानाउ, हरु सिंह पलथाना, गौरू सिंह कटराथल, ईश्वर सिंह भैरूपुरा, लेख राम कसवाली आदि शामिल थे। [4]

बाहरी कड़ियाँ

गैलरी

सन्दर्भ

  1. Thakur Deshraj:Jat Jan Sewak, 1949, p.317
  2. Dr Mahendra Singh Arya, etc: Ādhunik Jat Itihas, Agra, 1998, Section 9 pp. 21
  3. Thakur Deshraj:Jat Jan Sewak, 1949, p.317
  4. भारत का इतिहास कक्षा 12, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान, 2017, लेखक गण: शिवकुमार मिश्रा, बलवीर चौधरी, अनूप कुमार माथुर, संजय श्रीवास्तव, अरविंद भास्कर, p.155

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