Helak

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Location of Helak in Bharatpur district

Helak (हेलक) is a historical town in Kumher tahsil in Bharatpur district of Rajasthan.

Variants

Founder

Village was founded as Heruk by Harpaldeo Tomar.

Location

It is situated on rail track in the west of Bharatpur town.

Jat Gotras

Herokia Gotra gets name from village Heruk which later was called Helak situated in Kumher tahsil of Bharatpur district in Rajasthan.

Population

The Helak village has population of 4651 of which 2550 are males while 2101 are females as per Population Census 2011. [1]

History

Chatari of Tomars at Helak

The new governor of Agra, Khan-i-Dauran, knew that to crush Churaman by force of arms was an extremely difficult task. By temperament also he was more a man of diplomacy rather than force in dealing with the Jat problem. He sent several letters to Churaman, asking him to present himself before the Emperor. Churaman agreed and on 25th September, 1713 (16th Ramazan 1125 A.H.), arrived at Barahpula. Raja Bahadur Rathora, son of Azimush-shan’s maternal uncle, was sent to receive him. On 20th October, he marched in at the head of 3,000 to 4,000 sawars. Khan-i-Dauran advanced in person to receive and conduct him to Diwan-i-Khas. The Jat leader presented 21 mohars and two horses to the Emperor. Farrukah Siyar granted him the title of Rao Bahadru Khan along with a khilat and an elephant. His mansab was also increased. Three others (presumably including Khem Karan Sogaria) accompanying him, were also given the khilat. The charge of the royal highway from Barahpula (Delhi) to the Chambal was given to Churaman. [2], [3], [4], [5], [6], [7], [8] It is said that at the request of the Mir Bakshi he was also granted five parganas, Baroda Meo (Nagar), Kathumar, Akhaigarh (Nadbai) Au and Helak , as Jagir. Khem Karan Jat was given the title of “Bahandur Khan” and assigned the Jagir consisting of the paraganas Rupbas, Bharatpur , Malah, Aghapur, Barah and Ikran. [9], [10], [11], [12], [13]

हेरुकिया गोत्र का इतिहास

महात्मा के मंत्रों से बने पत्थर का नाग


हेरुकिया गोत नहीं है यह निकास ग्राम का सम्बोधन है इनका गोत्र तँवर है जिनको कुंतल और तोमर भी बोला जाता है हेरुक ग्राम जिसको राजस्व रिकॉर्ड में हेलक भी बोला जाता है |वर्तमान में हेलक गाँव जिला भरतपुर में तंवर जाटों का उजड़ा हुआ ग्राम है यहां से ही तंवर /तोमर/कुंतल जाट कुछ ग्रामो में बसे हेलक(पूर्व नाम हेरुक) से निकास होने के कारण इनको हेरुकिया भी बोल देते है पर यह गोत नहीं है कुछ समाजकंटक लोग जिनका विवाह नहीं होता है वो अपना गोत हेरुकिया बोल देते है ताकि शादी हो जाए ऐसे समाजकंटक लोगो का बहिष्कार पंचायत द्वारा किया जा चुका है।

हेरुक (वर्तमान नाम हेलक) की जड़े तोमर (कुन्तल) जाटों से जुड़ी हुई है। महाराजा अनंगपाल द्वितीय (खुटेलपट्टी के आदिपुरुष) के पौत्र अजयपाल देव के वंश में सल्तनत काल मे हरपाल देव हुए यह हरपाल देव ही हेरुक देव नाम से प्रसिद्ध थे। पुश्तेनी वंशावली इतिहास रखने वाले जगाओं के अनुसार हरपालदेव के नाम से यह स्थान हेरुक कहलाता था। यह हेरुक उस समय अजयगढ़ (वर्तमान अजान) के अधीन एक जगीदारी थी। आज भी स्थानीय वृद्ध ग्रामीण हेलक को हेरुक ही बोलते हैं।

तुगलक वंश के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक के समय इस ग्राम की एक लड़की की सुसराल पहलवार गोत्र के जाटों में रूपबास क्षेत्र में थी। एक बार हेलक से कुछ नवयुवक अपनी बुआ से मिलने जब रूपबास के क्षेत्र में आए तो उनको डाकुओं के आतंक की बात पता चली। यह नव युवक अपने गाँव हेरुक लोट आये तब उन्होंने पूरा हाल अपने गांव के बुजुर्गों को बताया। अंत मे यह निर्णय हुआ कि एक दल डाकुओं के उन्मूलन के लिए रूपबास क्षेत्र में जायेगा। रूपबास के निकट पहुँचकर पहलवार गोत्र के साथ मिलकर डाकुओं का समूल नाश कर दिया था।

हेरुक से गए कुछ लोगों ने उसी जगह जटमासी नामक नया गांव बसा कर स्थाई रूप से निवास किया। तोमर(तँवर) जाटों को हेरुक से आकर बसने के कारण हेरुकिया भी बोल दिया जाता है। आगे चलकर जटमासी से बहुत से ग्रामों का निकास हुआ था। स्थानीय लोगो के अनुसार खानवा के युद्ध मे जटमासी के सैकड़ो योद्धाओं ने राणा सांगा की तरफ़ से भाग लिया था। यहां से एक जाटों का दल धौलपुर होता हुआ जाट रियासत गोहद के नीरपुरा गढ़ी में आबाद हुआ है।

हेरुक में शेष रहे तोमर (तंवर) जाटों पर मुगल काल मे एक विपदा नाग के रूप में आ गई थी। उस समय हेरुक मे एक नागराज का आतंक चरम सीमा पार कर चुका था। सैकड़ो जाट नाग द्वारा काटे जाने से असमय काल के ग्रास बन चुके थे। एक सिद्ध महात्मा ने तंत्र विद्या से मंत्रोउच्चारित लड्डू के प्रहार से नाग राज को पत्थर का बना दिया था।वर्तमान में भी यह पत्थर का नाग इस गांव में मौजूद हैं। जिसकी पूजा भी की जाती है। सिद्ध महात्मा ने तोमर (तंवर) जाटों को आदेश दिया यदि अपने वंश की वृद्धि चाहते हो तो इस गाँव को छोड़कर अन्यत्र बस जाए ।महात्मा के आदेश अनुसार तोमर जाट हेरुक (हेलक), चिमनी, नगला खुटेला को वीरान छोड़कर कुछ अपनी रिश्तेदारों के गांव में तो कुछ न नया गांव बसा लिया था।

18 वी सदी में वीरान पड़े हेरुक गांव में भरतपुर रियासत ने कुछ गुर्जर जाति के परिवार को बसाया था। देश की आज़ादी के बाद कुछ शरणार्थियों को भी इस गाँव मे बसाया गया है।

संदर्भ: पाण्डव गाथा, पृ. 126-127

Notable persons

External links

References

  1. http://www.census2011.co.in/data/village/74653-helak-rajasthan.html
  2. Akhbarat,11,15 Ramzan (20,24 September), 11, Shawwal (20 October)
  3. Roznamcha, 136
  4. Kamwar, II, 399
  5. Irvine, Later Mughals, I, 223
  6. Satish Chandra, Parties and Politics, 123
  7. U.N. Sharma, Itihas, 237-239
  8. G.C.Dwivedi, The Jats, Their role in the Mughal Empire, Ed. Dr Vir Singh, Delhi, 2003, p.65
  9. Muttra Gazeteer,197
  10. Tarikh-i-bharatpur, 4a
  11. U.N. sharma, Itihas, 239, 243
  12. Thakur Deshraj: Jat Itihas, 568,556,557
  13. G.C.Dwivedi, The Jats, Their role in the Mughal Empire, Ed. Dr Vir Singh, Delhi, 2003, p.65

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