Bhagga
Author:Laxman Burdak, IFS (R) |
Bhagga (भग्ग) was one of the Janapadas during Buddhist period. This province is mentioned as Bharga (भर्ग) in Mahabharata which was subjugated by Bhimasena in his victory march. Its capital was Sunsumara recognized as Chunar (Mirzapur District of Uttar Pradesh.
Variants
Jat clans
Mention by Panini
Bharga (भर्ग), a tribe, is mentioned by Panini in Ashtadhyayi. [1]
Bhargayana (भार्गायण) gotra is mentioned by Panini in Ashtadhyayi. [2]
Bhargi (भार्गी) is mentioned by Panini in Ashtadhyayi. [3]
History
In Mahabharata
Bharga (भर्ग) in Mahabharata is mentioned (II.27.10), (VI.10.49)
Sabha Parva, Mahabharata/Book II Chapter 27 mentions the countries subjugated by Bhimasena. Bharga (भर्ग) Country is mentioned in Mahabharata (II.27.10).[4]....And the mighty son of Kunti (Bhimasena) then subjugated, by sheer force, the country called Vatsabhumi, and the king of the Bhargas, as also the ruler of the Nishadas and Manimat and numerous other kings.
Bhisma Parva, Mahabharata/Book VI Chapter 10 describes geography and provinces of Bharatavarsha. Bharga (भार्ग) Province is mentioned in Mahabharata (VI.10.49). [5]....the Mahyuttaras, the Pravrisheyas, and the Bhargavas, O king; the Pundras, the Bhargas, the Kiratas, the Sudoshnas, the Paramudasa,....
भग्ग या भर्ग
विजयेन्द्र कुमार माथुर[6] ने लेख किया है ...भग्ग (AS, p.653): बौद्ध कालीन गणराज्य. महाभारत में से भर्ग कहा गया है और इसका उल्लेख वत्स जनपद के साथ है. इसे भीमसेन ने अपनी दिग्विजय यात्रा में जीता था--'वत्सभूमिं च कौन्तेयॊ विजिग्ये बलवान् बलात् भर्गाणाधिपं चैव निषादाधिपतिं' सभापर्व 30, 10-11. धोनसारव जातक (संख्या 353) में भग्ग की सुंसुमारगिरि नामक राजधानी का वत्स और भर्ग का साथ-साथ उल्लेख है-- 'प्रतर्दनस्य पुत्रौ द्वौ वत्सभगौं बभूवत:' और प्रतर्दन के पुत्र का नाम भर्ग बताया गया है जिसके नाम पर यह जनपद प्रसिद्ध हुआ होगा. भर्ग-क्षत्रियों का उल्लेख ऐतरेय ब्राह्मण 3,84,31 तथा अष्टाध्यायी 4,1,111-177 में भी है. उपर्युक्त उल्लेख से भग्ग की स्थिति वत्स (कौशांबी-प्रयाग) के पार्श्ववर्ती क्षेत्र में सिद्ध होती है. सुंसुमारगिरि का अभिज्ञान चुनार (जिला मिर्जापुर) उत्तर प्रदेश की पहाड़ी से किया गया है.
जाट इतिहास
दलीप सिंह अहलावत[7] ने लिखा है कि.... जो 16 जनपद गौतमबुद्ध के समय से बहुत पहले से थे और उसके जीवनकाल में विद्यमान थे। इन जनपदों के नाम निम्न प्रकार से थे -
1. कौशल 2. मगध 3. काशी 4. मल्ल 5. चेदि 6. कुरु 7. पांचाल 8. मत्स्य 9. शूरसेन 10. गान्धार 11. काम्बोज 12. अङ्ग 13. वत्स 14. वज्जी या वृजि 15. अवन्ति 16. अश्मक (अस्सक)।
दलीप सिंह अहलावत[8] ने लिखा है कि....उपर्युक्त सोलह महाजनपदों के अतिरिक्त उस समय उत्तरी भारत में जाटों के निम्नलिखित प्रजातन्त्र गण सम्मानित रूप से शासन कर रहे थे -
(1) मौर्य-मौर गण - पिप्पलीवन में (2) शाक्य गण - कपिलवस्तु में (3) कोली गण - रामग्राम में (4) बुलिगण - अल्लकप्प में (5) भग्ग गण - सुंसुमार में (6) केकय (7) मद्रक (8) यौधेय गण (9) सिन्धु (10) सौवीर (11) शिवि गण (12) मल्ल गण (13) विदेह (14) लिच्छिवि गण।
External links
See also
References
- ↑ V. S. Agrawala: India as Known to Panini, 1953, p.452
- ↑ V. S. Agrawala: India as Known to Panini, 1953, p. 54
- ↑ V. S. Agrawala: India as Known to Panini, 1953, p. 89
- ↑ वत्सभूमिं च कौन्तेयॊ विजिग्ये बलवान बलात (II.27.9) भर्गाणाम अधिपं चैव निषादाधिपतिं तदा, विजिग्ये भूमिपालांश च मणिमत प्रमुखान बहून (II.27.10)
- ↑ मह्युत्तराः प्रावृषेया भार्गवाश च जनाधिप, पुण्ड्रा भार्गाः किराताश च सुदॊष्णाः परमुदास तदा (VI.10.49)
- ↑ Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.653
- ↑ Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter V,p.463
- ↑ Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter V,p.467