Sharabhanga Ashrama
Author:Laxman Burdak, IFS (R) |



Sharabhanga Ashrama (शरभङ्गाश्रम) refers to the name of a Tīrtha (pilgrim’s destination) mentioned in the Mahābhārata (cf. III.83.39). The epic Ramayana legacy around hillock near Sarbhanga Ashrama (सरभंगा आश्रम) known as 'Siddha Pahar', where Lord Rama vowed to eliminate demons and spent nearly 12 years of exile have almost eliminated due to mining. [1] It is located on Ram Van Gaman Path.
Location
It is located on Ram Van Gaman Path.
Variants
- Sharabhangashrama शरभंगाश्रम (AS, p.890)
- Śarabhaṅgāśrama (शरभङ्गाश्रम)
- Sharabhanga (शरभंग)
- Sarbhanga Ashram (सरभंगा आश्रम)
History
Sri Rama visited the Sharabhanga Ashrama:
Sri Rama visited the hermitage of sage Sharabhanga in the Dandakaranya forest. During that time, Indra came to take the sage to the abode of Brahma as a fruit of his great penance. However, the sage refused since he was waiting for the arrival of Sri Rama. Sage Sharabhanga offered the fruits of his penance to Sri Rama. Sri Rama refused and asked only for a place of stay. Sage Sharabhanga told Sri Rama to go to sage Suteekshna (following river Mandakini). Then he entered the sacred fire, gave up his body and went to the abode of Brahma.[2]
In Mahabharata
Sharabhangashrama (शरभङ्गाश्रम) (Tirtha) Mahabharata (III.83.39)
Vana Parva, Mahabharata/Book III Chapter 83 mentions names of Pilgrims. Sharabhangashrama (शरभङ्गाश्रम) (Tirtha) is mentioned in Mahabharata (III.83.39).[3].....Proceeding next to the asylum of Sarabhanga (शरभङ्गाश्रम) (III.83.39) and that of the illustrious Shuka (शुक) (3.83.39), one acquireth immunity from misfortune, besides sanctifying his race.
शरभंगाश्रम
विजयेन्द्र कुमार माथुर[4] ने लेख किया है ...शरभंगाश्रम (AS, p.890) : ज़िला बांदा (उत्तर प्रदेश) में इलाहबाद-मानिकपुर रेलमार्ग के जैतवारा स्टेशन से लगभग 15 मील दूर वनप्रांत में स्थित शरभंग के नाम से प्रसिद्ध स्थान को शरभंगाश्रम कहा जाता है। (दे.ऊनकेश्वर). यहाँ श्रीराम का एक मन्दिर स्थित है। शरभंगाश्रम का उल्लेख बाल्मीकि तथा कालिदास के अतिरिक्त तुलसीदास ने भी किया है- ‘पुनि आये जहं मुनि सरभंगा, सुन्दर अनुज जानकी संगा’। यह स्थान विराधवन के निकट ही स्थित था। (दे. विराधाकुंड). अध्यात्म. आरण्य. 2,1 में इसका वर्णन इस प्रकार है- ‘विराधे स्वर्गते रामो लक्ष्मणेन च सीतया, जगाम शरभंगस्य वनं सर्वसुखाबहम्’।रामायण की कथा के प्रसंग से इसकी अवस्थिति को ऊनकेश्वर की अपेक्षा जिला बांदा में मानना अधिक समीचीन जान पड़ता है. (दे. सुतीक्षणाश्रम)
सुतीक्ष्णाश्रम
विजयेन्द्र कुमार माथुर[5] ने लेख किया है ... सुतीक्ष्णाश्रम (AS, p.973), जिला बंदा, उ.प्र. में इलाहाबाद-मानिकपुर रेल मार्ग पर जैतवारा स्टेशन से 20 मील और शरभंग आश्रम से सीधे जाने पर 10 मील पर स्थित है. वाल्मीकि रामायण में चित्रकूट से आगे जाने पर अनेक मुनियों के आश्रम से होते हुए राम-लक्ष्मण-सीता के ऋषि सुतीक्षण के आश्रम में पहुंचने का उल्लेख है. यहां वे वनवास काल के दसवें वर्ष के व्यतीत होने पर पहुंचे थे--'रमतः च आनुकूल्येन ययुः संवत्सरा दश । परिसृत्य च धर्मज्ञः राघवः सह सीतया ॥३-११-२७॥ सुतीक्ष्णस्य आश्रमम् श्रीमान् पुनर् एव आजगाम ह । स तम् आश्रमम् आगम्य मुनिभिः परिपूजितः ॥३-११-२८॥ तत्र अपि न्यवसत् रामः कंचित् कालम् अरिन्दमः । अथ आश्रमस्थो विनयात् कदाचित् तम् महामुनिम् ॥३-११-२९॥' अरण्यकांड 11,27-28-29. यहां से वे सुतीक्षण के गुरु अगस्त्य के आश्रम में पहुंचे थे. रघुवंश, 13,41 में पुष्पकविमानारूढ राम सुतीक्ष्ण का वर्णन इस प्रकार करते हैं,'हविर्भुजां एधवतां चतुर्णां मध्ये ललाटंतपसप्तसप्तिः । असौ तपस्यत्यपरस्तपस्वी नाम्ना सुतीक्ष्णश्चरितेन दान्तः ' सुतीक्षण आश्रम के आगे शरभंग आश्रम का तथा फिर चित्रकूट का वर्णन रघुवंश-13 में होने से सुतीक्ष्ण आश्रम की स्थिति उपर्युक्त अभिज्ञान के अनुसार ठीक समझी जा सकती है, क्योंकि चित्रकूट इस स्थान से अधिक दूर नहीं होना चाहिए. चित्रकूट भी जिला बांदा में ही है. अध्यात्म रामायण अरण्यकांड 2,55 में सुतीक्षण के आश्रम का इस प्रकार वर्णन है--'सुतीक्ष्णास्याश्रमं प्रागात्प्रख्यातमृषीसंकुलम्, सर्वतुर्गुण सम्पन्नं सर्वकालसुखावहम्' तुलसीदास ने रामचरितमानस, अरण्यकांड दोहा-9 के आगे सुतीक्ष्ण-राम-मिलन का मधुर वर्णन किया है. (देखें शरभंग आश्रम)
सरभंगा आश्रम
वनवास काल के दौरान चित्रकूट से जाते समय भगवान राम का सरभंगा आश्रम और सुतीक्ष्ण आश्रम जाना हुआ था. चित्रकूट में सरभंगा आश्रम आज भी मौजूद है. इस आश्रम की कहानी बड़ी दिलचस्प है. प्रभु राम जब चित्रकूट से वनवास काल पूरा करने के बाद प्रस्थान कर रहे थे. तब प्रभु राम अमरावती आश्रम और सरभंगा आश्रम में रुके थे. इसीलिए सरभंगा आश्रम का काफी बड़ा महत्व चित्रकूट में माना जाता है. पर्यटन के लिहाज से यह जगह काफी विकसित हो रही है. यहां के महात्मा बताते हैं कि यदि आप 10 बार गंगा का स्नान करते हैं और यदि एक बार आप चित्रकूट के सरभंगा आश्रम आते हैं तो आपको बड़ा पुण्य मिलेगा.
चित्रकूट के संत राजेशानंद जी महराज बताते हैं कि वनवास काल के दौरान चित्रकूट से जाते समय भगवान राम का सरभंगा आश्रम और सुतीक्ष्ण आश्रम जाना हुआ था. दोनों ही स्थान हजारों वर्ष बाद आज भी वैसे ही शांति एवं राम-मय भक्ति को खुद में समेटे है. ये स्थान चित्रकूट से सटे मझगवां इलाके में स्थित है. लेकिन आज तक पर्यटन की मुख्य धारा से नहीं जुड़ पा रहा है.
Source - Mahi Jha, News18 Uttarakhand, August 11, 2023
सरभंगा आश्रम की स्थिति
वनवास काल के दौरान चित्रकूट से जाते समय भगवान राम का सरभंगा आश्रम और सुतीक्ष्ण आश्रम जाना हुआ था। दोनों ही स्थान हजारों वर्ष बाद भी आज वैसे ही शांति एवं राम-मय भक्ति को खुद में समेटे है। ये स्थान चित्रकूट सीमा से सटे मझगवां (एमपी) इलाके में स्थित है।
सुतीक्ष्ण आश्रम जिला चित्रकूट की सीमा से सटे इलाहाबाद-मानिकपुर रेल मार्ग पर जैतवारा स्टेशन से 20 मील और शरभंग आश्रम से सीधे जाने पर 10 मील पर स्थित है। वाल्मीकि रामायण में चित्रकूट से आगे जाने पर अनेक मुनियों के आश्रम से होते हुए राम-लक्ष्मण-सीता के ऋषि सुतीक्षण के आश्रम में पहुंचने का उल्लेख है। यहां वे वनवास काल के दसवें वर्ष के व्यतीत होने पर पहुंचे थे।
तुलसीकृत रामायण में इस बात का जिक्र किया गया है। कि भगवान अपने वनवास के दौरान चित्रकूट में 12 वर्ष बिताया। फिर महाराज दशरथ का देहावसान हो जाता है। इसके बाद भरत जी राम को बुलाने वनवास की ओर कूच करते है। जहां चित्रकूट में भरत मिलाप होता है। इसके बाद राम चित्रकूट से प्रस्थान करते है। और अमरावती आश्रम के रास्ते सरभंग मुनि आश्रम में सरभंग जी से मिलने के बाद एक दिन यही रुकतें है। ऐसा मंदिर के संत-महात्मा बताते है।
Source - www.patrika.comJul 29, 2023, by Vikash Kumar
External links
References
- ↑ Ram Footprint Sarbhanga Ashram Sites to be protected, Times of India, 3.6.2016
- ↑ Sri Rama visiting the Sharabhanga Ashrama in the Dandakaranya forest
- ↑ शरभङ्गाश्रमं गत्वा शुकस्य च महात्मनाः, न दुर्गतिम अवाप्नॊति पुनाति च कुलं नरः (III.83.39)
- ↑ Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.890-891
- ↑ Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.973