Bains

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Vains (वैन्स) Vainas (वैनस) Bainsa (बैन्सा)[1][2] is gotra of Jats. [3] Bains(बैंस)][4][5] [6] gotra Jats are found in Punjab, India and Pakistan.

Origin

  • कुछ गोत्रों का प्रचलन पशु, पक्षियों के नाम पर हुआ है. भैंस से बैंस जाट गोत्र प्रचलित होना माना जाता है. [8]

Mention by Panini

Mahisha (माहिष), allowances of Mahishi (महिषी), 404 is mentioned by Panini in Ashtadhyayi. [9]

History

Bhim Singh Dahiya[10] writes with reference to Heornle and Cunningham that Harshavardhana belonged to this clan. He is connected with Shrimalpur which is a village on the border of Hoshiarpur and Jullundhar districts in Punjab and is nowadays called Māhalpur. Even today it is inhabited by Bains clan of Jats. [11] They are mentioned in Mahabharata along with Khatkal, Karaskar, Mahishaka, Karkana and Viraka, by their Sanskrit name Mahisha which becomes or Bhains or Bains in Indian languages of english word buffalo. [12] Bains is one of 36 royal clans in India along with Salar, Dahima etc.

बैंस गोत्र

बैंस गोत्र - उड़ीसा में भुवनेश्वर के पास स्थित उदयगिरि पर मंचापुरीगुफा के ऊपरी मंजिल में गुफा के दूसरे और तीसरे द्वार के रास्ते में उठे हुये स्थान पर तीन पंक्तियों का अभिलेख (I- मंचापुरीगुफा शिलालेख) खुदा हुआ है। यह शिलालेख राजा खारवेल की प्रमुख रानी आगा-महिसी (Aga Mahishi) द्वारा जैन भिक्षुओं के लिए अर्हतों के मंदिर के निर्माण और गुफा की खुदाई का उल्लेख करता है । देवनागरी लिपि का पाठ इस प्रकार है : L.1- अरहंत पसादाय कलिंगानं समनानं लेनं कारितं राजिनो ललाकस, L.2- हथिसिहस पपोतस धुतुना कलिंग चकवतिनो सिरिखारवेलस, L.3- अगमहिसिना कारितं । अर्थात जैन अर्हतों के आशीर्वाद से कलिंग के चक्रवर्ती महाराजा खारवेल की प्रमुख महारानी, हाथीसीह (हस्ती सिंह) की परपौती और ललाक अथवा ललार्क की पुत्री, अगा-महिसी ने यह अभिलेख कलिंग के श्रमणों के लिए खुदवाया। तत्समय की परंपरा के अनुसार रनियों की पहचान अपने नाम के साथ पिता के गोत्र के साथ की जाती थी। खारवेल की प्रमुख महारानी अगा-महिसी के नाम पर विचार किया जावे तो स्पष्ट होता है कि वह 'अगा' नाम की 'महिषी' गोत्र की रानी थी।

भीमसिंह दहिया[13] ने लिखा है कि यह संभव है कि महिषक जिनको हाथीगुंफा अभिलेख में मुसिक लिखा है, बैंस का संस्कृत रूप हो क्योंकि भारतीय भाषाओं में बैंस को भैंस बोला जाता है। [14]

वसाति या वैस (नागवंश) का इतिहास

दलीप सिंह अहलावत[15] लिखते हैं कि भोगवतीपुरी का शासक नागराज वासुकि नामक सम्राट् था। यह वसाति या वैस गोत्र का था जो कि जाट गोत्र है। इस वंश का राज्य वसाति जनपद पर भी था जो रामायणकाल में पूरी शक्ति पर था। इस वंश का वैभव महाभारतकाल में और भी चमका। द्रोण पर्व में कई स्थानों पर वसाति क्षत्रियों का वर्णन है जिस से यह प्रमाणित है कि ये भी महाभारत युद्ध में सम्मिलित हुये थे1। कुछ लेखकों को वसाति के अपभ्रंश शब्द वैस से वैश्य (बनिया) का भ्रम हो गया है। कनिंघम और मिश्रबन्धु द्वारा ऐसे लेखकों का खण्डन किया गया है। (जाटों का उत्कर्ष पृ० 319, लेखक योगेन्द्रपाल शास्त्री, जाट इतिहास उर्दू पृ० 355, लेखक ठा० संसारसिंह)। राहुल सांकृत्यायन ने अपनी पुस्तक ‘वोल्गा से गंगा’ पृ० 243 पर लिखा है कि “हर्षवर्धन का वंश वैस है जो कि क्षत्रिय वंश है। यह वंश वैश्य बनिया नहीं।”

पाठकों को ज्ञात होना चाहिए कि वैश्य (बनिया-महाजन) समाज में वैस नामक कोई गोत्र नहीं है। होशियारपुर (पंजाब) के समीप श्रीमालपुर प्राचीन काल से वसाति क्षत्रियों का निवास स्थान है। यहां का पुष्पपति नामक पुरुष अपने कुछ साथियों सहित श्रीमालपुर से चलकर कुरुक्षेत्र में आया और यहां श्रीकण्ठ (थानेश्वर बसाकर इसके चारों ओर के प्रदेश का राजा बन गया। यह शैव धर्म का कट्टर अनुयायी था। इसका पुत्र नरवर्द्धन 505 ई० में सिंहासन पर बैठा। इस के पुत्र राज्यवर्द्धन और आदित्यवर्द्धन पहले गुप्तों के सामन्त (जागीरदार) थे और बाद में थानेश्वर के महाराजा हुए। आदित्यवर्द्धन की महारानी महासेनगुप्ता नामक गुप्तवंश की कन्या थी। इससे


1. वसाति क्षत्रिय महाभारत युद्ध में कौरवों की तरफ से लड़े थे। (द्रोण पर्व व भीष्म पर्व 51वां अध्याय)।


जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठान्त-243


पुत्र प्रभाकरवर्द्धन की उत्पत्ति हुई। ए० स्मिथ के लेख अनुसार प्रभाकरवर्द्धन की यह माता गुप्तवंश (धारण जाट गोत्र) की थी जिसने अपने पुत्र में उच्चाकांक्षाएं उत्पन्न कीं और उनकी पूर्ति में यथाशक्ति सहायता दी।

पुष्पभूति वंश का पहला महान् शासक प्रभाकरवर्द्धन था। राज्यकवि बाणभट्ट की प्रांजल भाषा में यह प्रभाकरवर्द्धन - “हूणरूपी हरिण के लिए सिंह, सिंधुदेश के राजा के लिए ज्वर, गुर्जरों की नींद नष्ट करने वाला, गांधारराजा रूपी हाथी के लिए कूट हस्तिज्वर, लाटों (गुजरात) की चतुरता को हरण करने वाला और मालव देश की लता रूपी लक्ष्मी के लिए कुठार (फरसा) था।” उसने हूणों को पराजित किया तथा सिंधु, उत्तरी गुजरात आदि को अपने अधीन किया। यह होते हुए भी उसने उन विजित राज्यों को छीना नहीं।

प्रभाकरवर्द्धन की रानी यशोमती से राज्यवर्द्धन का जन्म हुआ। उसके चार वर्ष बाद पुत्री राजश्री और उसके दो वर्ष बाद 4 जून 590 ई० को हर्षवर्द्धन का शुभ जन्म हुआ। राज्यश्री का विवाह मौखरीवंशी1 (जाट गोत्र) कन्नौज नरेश ग्रहवर्मा के साथ हुआ था। किन्तु मालवा और मध्य बंगाल के गुप्त शासकों ने ग्रहवर्मा को मारकर राज्यश्री को कन्नौज में ही बन्दी बना दिया। इनमें मालवा का गुप्तवंश का राजा देवगुप्त था और मध्य बंगाल का गुप्तवंश का राजा शशांक था जो दोनों ही धारण2 गोत्री जाट शासक थे। थानेश्वर में यह सूचना उस समय मिली जबकि सम्राट् प्रभाकरवर्द्धन की मृत्यु सन् 605 ई० में हुई थी, जिस के कारण शोक की घटाएं छाई हुईं थीं। इसके बाद उसके बड़े पुत्र राज्यवर्द्धन ने राजगद्दी सम्भाली। उसने 10 हजार सेना के साथ मालवा पर आक्रमण करके देवगुप्त का वध कर दिया। फिर वहां से बंगाल पर आक्रमण करने के लिए वहां पहुंच गया। परन्तु मध्यबंगाल में गौड़ जनपद के गुप्तवंशी (धारण जाट गोत्र) राजा शशांक ने अपनी पुत्री के साथ राज्यवर्द्धन का विवाह कर देने का वचन देकर विश्वास प्राप्त कर लिया और अपने महलों में बुलाकर राज्यवर्द्धन का वध कर दिया। ---

1, 2. जाट इतिहास उर्दू पृ० 356 लेखक ठा० संसारसिंह।

Distribution in Uttar Pradesh

Village in Hapur district

Behlolpur Hapur,

Villages in Haridwar district

Ruhalki Dayalpur,

Distribution in Haryana

Village In Kurukshetra district

Shahabad. Shadipur , Shaheeda, Udarsi, Bagthala, Kamoda, Ammin, Adhoi, Jatpura

Village in Gurgaon district

Dayalpur दयालपुर,

Village in hisar district

Kheharखेहर, Lathal लाथल,

Distribution in Punjab

Villages in Gurdaspur district

Bains named Village is in Gurdaspur tahsil in Gurdaspur district in Punjab.

In Gurdaspur district the Bains population is 3,189. [16]

Villages in Patiala district

Bains population is 3,012 in Patiala district. The clan holds many villages in the sub-district of Narwana as well as some in the Sub-districts of Sunam and Patiala.[17]

Villages in Ludhiana district

Bains population is 741 in Ludhiana district.[18] Mushkabad,Tapparian

Villages in Jalandhar district

Talhan, Kandola (Adampur),Mazara Kalan, Shahatpur, Punu mazara, Chak Bilsa, Mirpur Lakha, Malah, Mahmudpur, Khandaula Sarowal,Sundarpur and Khojpur According to B S Dhillon the population of Bains clan in Jalandhar district is 6,450.[19]

Bains: A fair sized village in District Jullundur, Punjab, it is close to the town of Banga. Many of the inhabitants of this village are of the Bains Jat clan and almost all of the village land is their property.[20]

Villages in Hoshiarpur district

Add by manvendra singh tomar


Bains Khurd, Bains Taniwala ,Nangal khurad,Kahri, Chabbewal,Gond Pur,Manak Dheri,Kasbaa, Khera,Bhalta,Ganeshpur,Nangal Kalan,Bains Awan, In Hoshiarpur district the Bains population is 17,190. This clan holds 12 villages near the Mahilpur town.[21]

Villages in Ludhiana district

Villages in Nawanshahr district

Malla Bedian,

Villages in Rupnagar district

Villages in Moga district

Bains villages in Moga District include Singhpura urf Munan

Distribution in Pakistan

The Bains are one of the larger Jat clans. Prior to partition, the Muslim branch of this clan extended from Rawalpindi in the west to Hoshiarpur in the east. Many Bains Jat are also settled in the canal colony districts of Faisalabad and Sahiwal. After partition, Muslim members of this tribe moved to Pakistan. The Bains are the largest Jat clan in Rawalpindi District.

Notable persons

References

  1. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. ब-68
  2. O.S.Tugania:Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu, p.53, s.n. 1821
  3. Mahendra Singh Arya et al.: Ādhunik Jat Itihas, Agra 1998, p. 267, 271
  4. B S Dahiya:Jats the Ancient Rulers (A clan study)/Jat Clan in India, p.236, s.n.18
  5. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Parishisht-I, s.n. ब-37
  6. O.S.Tugania:Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu, p.53, s.n. 1820
  7. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter III,p.242
  8. Dr Ompal Singh Tugania, Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu/Gotra, p.6
  9. V. S. Agrawala: India as Known to Panini, 1953, p.67
  10. Bhim Singh Dahiya, Jats the Ancient Rulers (A clan study), p. 281
  11. Bhim Singh Dahiya: Jats the Ancient Rulers, p. 247
  12. Bhim Singh Dahiya: Jats the Ancient Rulers, p. 261
  13. Bhim Singh Dahiya : Jats the Ancient Rulers ( A clan study), p. 195
  14. ASI, 1971-73, Vol. VI, P. 47.
  15. जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठ.243-244
  16. History and study of the Jats. B.S Dhillon. p.127
  17. History and study of the Jats. B.S Dhillon. p. 126
  18. History and study of the Jats. B.S Dhillon. p.123
  19. History and study of the Jats. B.S Dhillon.p. 127
  20. History and study of the Jats. B.S Dhillon. p.126
  21. History and study of the Jats. B.S Dhillon. p.127
  22. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter III (Page 246)
  23. 'Jat Privesh', July 2015,p. 18
  24. Ministry Of Home Affairs (Public Section), Padma Awards Directory (1954-2013), Year-Wise List
  25. https://images.app.goo.gl/unwkmsjsztmfM3Nd8

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