Ramtek

From Jatland Wiki
(Redirected from Ramateka)
Jump to navigation Jump to search
Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Ramtek on Nagpur District Map

Ramtek (रामटेक) is town in Nagpur district in Maharashtra. Its ancient name was Ramagiri (रामगिरि).

Variants of name

  • Ramateka (रामटेक) (AS, p.789)
  • Ramagiri रामगिरि (1) = Ramtek रामटेक]] AS, (p.788)
  • Tapogiri तपोगिरि = Ramtek (रामटेक) (जिला नागपुर, माह.) (AS, p.389)
  • Sinduragiri सिंदूरगिरि = Ramtek रामटेक पहाड़ियाँ, (AS,p.957)

Origin

History

Riddhapur plates of 19th year reignal year of Prabhavatigupta mentions this place as Ramagiri (रामगिरि). [1]


Ramagiri is undoubtedly modern Ramtek, about 28 miles north of Nagpur. It lies only about 3 miles from Nandivardhana, modern Nagardhan, the earlier capital of the Vâkàtakas. In Kâlidasa's Meghadûta, Râmagiri is mentioned as the place where the Yaksha, exiled from Alakā, lived for a year. From the description in Kālidāsa's poem we learn that the hill was marked by the vénérable foot-prints of Raghupati (Ramachandra), and it is noteworthy that the present grant was made by Prabhâvatîguptâ near the foot-prints of the Lord of Râmagiri. The geographical situation of Râmtek answers to the description of Râmagiri in the Meghadûta and it is known to have been regarded as a holy place for several centuries. There should therefore be no doubt about this identification. Several grants of Prabhâvatîguptâ and Pravarasena II were made after being offered to the Bhagavat who was plainly none but the god Râmachandra whose pàdukâs were installed at Râmagiri.

Ramtek has got Historic temple of lord Rama. It is believed that Ramtek was the place where Rama, the Hindu god, rested while he was in exile. This place is also famous for its relation with Great poet Kalidasa. Kalidasa has written Meghdootum in hills of Ramtek. Late Indian Prime Minister Mr. Narsimha Rao contested his election from Ramtek Constituency.

रामटेक

रामटेक (AS, p.789): विजयेन्द्र कुमार माथुर[2] ने लेख किया है .....रामटेक महाराष्ट्र राज्य के नागपुर से 20 मील की दूरी पर रमणीक और ऊंची पहाड़ियों पर स्थित है। कुछ विद्वानों के मत में यह महाकवि कालिदास के 'मेघदूत' में वर्णित रामगिरि है। यहाँ विस्तीर्ण पर्वतीय प्रदेश में अनेक छोट-छोटे सरोवर स्थित हैं, जो शायद 'पूर्वमेघ' में उल्लिखित 'जनकतनया स्नान पुण्योदकेषु' में निर्दिष्ट जलाशय हैं। किंवदंती है कि वनवास काल में राम, लक्ष्मण तथा सीता इस स्थान पर रहे थे। रामचंद्र जी का एक सुंदर मंदिर ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर के निकट विशाल वराह की मूर्ति के आकार में कटा हुआ एक शैलखंड स्थित है। रामटेक को सिंदूरगिरि भी कहते हैं। इसके पूर्व की ओर 'सुरनदी' या 'सूर्यनदी' बहती है। इस स्थान पर एक ऊंचा टीला है, जिसे गुप्तकालीन बताया जाता है। चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री प्रभावती गुप्त ने रामगिरि की यात्रा की थी। इस तथ्य की जानकारी रिद्धपुर के ताम्रपत्र लेख से होती है। प्राचीन जनश्रुति के अनुसार रामचंद्र जी ने शंबूक का वध इसी स्थान पर किया था।

सिंदूरगिरि

Sinduragiri सिंदूरगिरि (AS,p.957): = रामटेक जिला नागपुर महाराष्ट्र की पहाड़ियों का एक नाम है. इन पहाड़ियों में लाल रंग का पत्थर मिलता है जिसका सिंदूर का सा वर्ण है. किंवदंती है कि नृसिंह अवतार में हिरण्यकशिपु के रक्त से स्थान लाल रंग का हो गया था. [3]

तपोगिरि

विजयेन्द्र कुमार माथुर[4] ने लेख किया है ...तपोगिरि (AS, p.389) रामटेक) (जिला नागपुर, माह.) का प्राचीन नाम है। किंवदंती के अनुसार यह माना जाता है कि अपने वनवास काल में श्रीरामचन्द्र, सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ यहाँ कुछ दिन ठहरे थे। यहाँ प्राचीन काल में अनेक तपस्वियों के आश्रम थे, जो इसके नामकरण का कारण है।

References

  1. Corpus Inscriptionum Indicarum, Vol. V, 1963, pp.33-37:L.1 जित (त) भगवता ।। रामगिरिस्वामिन=पादमूलाद्गुप्तान (ना) मादि
  2. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.789
  3. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.957
  4. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.389

Back to Maharashtra