Ghirth

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Ghirth Jat is a community found in Himachal Pradesh. Ghirth is a pahari word and Chang is a Punjabi word. Presently this community known by Choudhary peoples of Himachal Pradesh

Jat clans

There are several jat gotras in this community like Kondal, Kaundal, Bhati, Badiar, Chang, Rard, Nara, Kundhal, Sial etc.

History

H.A. Rose[1] writes that Folk etymology derives Ghirth from ghi, because Shiv made them out of ghi. In Hoshiarpur Ghirths are called Bahti. In Hindustan they are called Kurmi. Chang is the Punjabi name, and Ghirth the Pahari word. For details see - A glossary of the Tribes and Castes of the Punjab and North-West Frontier Province By H.A. Rose Vol II/G, Ghirth: p.288

Jats Of Himachal Pradesh

हिमाचल का जाट कबीला जिससे ज्यादातर लोग अनजान है घिरथ एक पहाड़ी शब्द है जिसका मतलब घृत यानि घी से है यह समाज मूल रूप से जाट है जो 700 पहले राजस्थान ,पंजाब से पहाड़ी क्षेत्र में आकर बस गए जेम्स लिप्पिन ल्याल पेज 640 पर लिखते है की पहाड़ी क्षेत्र में जाट लोगो को घिर्थ बोला जाता है जिसका कारन उनका अधिक मात्रा में घी का सेवन करना है इसलिए इनको घी अहारी यानि घिरथ] बोला जाता है | हिमाचल के चौधरी घिरथ कहे जाते है जबकि सम्पूर्ण भारत वर्ष में चौधरी जाटों का पर्यायवाची माना जाता है | घिरथ लोग भी अपनी उत्पत्ति भगवान शिव से मानते है क्यों की हिन्दुओ के पवित्र ग्रन्थ देव संहिता में जाटों की उत्पत्ति शिव से बताई गयी है अपने जाट (जट्ट ) भाइयो की तरह यह पहाड़ी जाट भी एक उत्तम कृषक और बहादुर सैनिक है | इन में औरतो को जाटों के सम्मान पूजनीय स्थान प्राप्त है इसलिए यह विधवाः होने पर जाटों की तरह करा देते है यानि पुनः विवाह कर देते है जोकि इनके जाट क्षत्रिय होने का प्रमाण है पंजाब में राजा महाराजा जाट (जट्ट) ही हुए है इन वीर जाटों ने मोहम्मद तुगलक के कराचील यानि नगरकोट के हमले को नाकाम किया हिमाचल में #_चौधरी के 360 गोत्र है जो काँगड़ा ,ऊना और उस से लगते पंजाब के होशियारपुर में निवास करते है | इनके सम्पूर्ण गोत्र #_जाट_समाज से मिलते है पूर्वी भाग में इनको बाहति पक्ष्चिम में चांग चाहंग बोलते है यह चाहंग शब्द मूल रूप से चाहड़ है जो जाटों का गोत्र है जिसको ब्रज क्षेत्र में चाहर तो पंजाब में चाहल बोलते है इनके 8 मुख्य -

  • 1 कुण्डल /कोंडल - राजस्थान के टोंक और जयपुर जिलों के 28 से ज्यादा गामो में है 1881 में हिमाचल में इनकी जनसँख्या 24,392 थी
  • २.भादू /भरद्वाज -जिसके गाम सम्पूर्ण भारत में 100 से ज्यादा है इनकी 1881 में आबादी 8330 थी
  • ३. पाथरी - इस गोत्र क जाट मध्यप्रदेश और राजस्थान में है हिमाचल में इनके 3091 आबादी थी
  • 4 .छाबरु /छाबा - इस गोत्र के 60 गाम राजस्थान में है 1881 में हिमाचल में इनकी 2717 आबादी थी
  • 5. रेडू - यह गोत्र हरयाणा और पंजाब में बहुत मिलता है हिमाचल में यह 1881 में 2532 थे ,
  • 6. बढियाल यह गोत्र बैदवान बडियार भी बोला जाता है जिसके ७० गाम है इनकी 1881 में 2058 आबादी थी
  • 7 छोड़ा - इनकी 1881 में 1695 आबादी थी
  • 8 बट्टू /भट्टू यह गोत्र पंजाब के जट्ट लोगो में और हरयाणा के जट्ट लोगो में बहुत संख्या में है इनकी 1881 में 1122 आबादी थी

जाटों (जट्टों ) और हिमाचल के चौधरीओ के समान गोत्र की कुछ सूची नीचे दी गयी है सोहल। सियाल , गिद्दड़ ,धारवाल ,धारीवाल ,काला ,नीला, भूरा ,घोरा ,गिल ,ताखर ,राठी ,नौल ,मसन्द ,,कुण्डल भरद्वाज ,बढियाल ,रेडू ,छाबरू ,खांगड़ ,हरि,खेरा ,कासाब ,बंगु ,खट्टा ,डेलू ,पणयारीअ ,पूनिया ,थिम्बू ,बैंस , मलिक आदि लगभग 100% गोत्र पंजाबी और हरियाणवी जाटो के है

Distribution in Himachal Pradesh

This community mainly found in Kangra, Hamirpur and Una district of Himachal Pradesh.

Notable persons

References


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