Meham

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Location of Meham in Rohtak District

Meham (मेहम) is a town and tehsil in Rohtak district in Haryana. It is also a constituency of Haryana Vidhan Sabha. Meham is an ancient, historical town.

History

Mahottha (महोत्थ) was a Janapada mentioned in Mahabharata. The chief of this place, Akrosha was conquered by Nakula during his victory march. [1][2][3] It is a variant of Mahettha (महेत्थ) which may probably be identified with Meham city in Rohtak district of Haryana.

महोत्थ

महोत्थ (AS, p.730): रूपांतर महेत्थ. 'शैरीषकं महोत्थं च वशेचक्रे महाद्युतिः,आक्रोशं चैव राजर्षि तेन युद्धमभून्महत्' महाभारत सभापर्व 32,6. नकुल ने अपनी दिग्विजय यात्रा के प्रसंग में शैरीषक (=सिरसा, हरयाणा) और महोत्थ पर अधिकार कर लिया था. महोत्थ के राजा का नाम आक्रोश बताया गया है. इस प्रदेश को 32,5 में बहुधान्यक कहा गया है. दक्षिणी पंजाब (वर्तमान हरयाणा) का यह क्षेत्र जिसमें रोहतक, सिरसा स्थित हैं, आज तक भारत के उपजाऊ क्षेत्र में गिना जाता है. महोत्थ सिरसा के निकट ही स्थित होगा.[4]

In Mahabharata

Mahottha (महोत्थ) Mahabharata (II.32.6)

Mahettha (महेत्थ) Mahabharata (II.32.6)

Mahabharata (II.32.6) mentions Mahottha (महोत्थ)-- 'शैरीषकं महोत्थं च वशेचक्रे महाद्युतिः,आक्रोशं चैव राजर्षि तेन युद्धमभून्महत्' महाभारत सभापर्व 32,6. ....And the illustrious Nakula after this, subjugated the whole of the desert country (Marubhumi) and the region known as Sairishaka (Sirsa) full of plenty, as also that other one called Mahetta. And the hero had a fierce encounter with the royal sage Akrosa.

Sabha Parva, Mahabharata/Book II Chapter 29 mentions the Countries subjugated by Nakula in West. Mahettha (महेत्थ) is mentioned in Mahabharata (II.29.6). [5]....Nakula subjugated the whole of the desert country (Marubhumi) and the region known as Sairishaka (Sirsa) full of plenty, as also that other one called Mahettha (= Meham), Shibis, Trigartas, Ambashthas, Malava, Panchakarpatas.....

Means : इस प्रदेश के मध्य स्थान शैरीषक (सिरसा) और महेत्थं (महम) आदि को उस तेजस्वी नकुल ने जीता । शैरीषक = सिरसा, महेत्थं = महम. महम और सिरसा भी महाभारत के जमाने से पहले के बसे हुए नगर हैं ।

Villages in Maham tahsil

Ajaib, Balhemba, Bainsi, Bedwa, Bhaini Bharon, Bhaini Chanderpal, Bhaini Maharajpur, Bhaini Surjan, Bharan, Chandi, Farmana Badshahpur, Farmana Khas, Gugaheri, Gurawar, Kharak Jatan, Kharkhra, Kherainti, Kheri Maham (खेड़ी महम), Lakhan Majra, Madina, Madina Gindhran, Madina Kaursan, Maham(MC), Mokhra Khas, Mokhra Kheri Rojh, Mokhra Kheri, Muradpur Tekna, Nidana, Nindana, Seman, Shekhupur Titri, Sisar Khas,

महम चौबीसी खाप

यह खाप अपने जुझारूपन के लिए प्रसिद्द है. इसमें धत्तरवाल,मलिक, दलाल, राठी, बूरा गोत्रीय जाटों के गाँव सामिल हैं. यह वाही खाप है जिसने कलानौर के जालिम नवाब को समूल उखाड़ फेंका था और आज भी राजनेताओं का समय समय पर मार्ग-दर्शन करती रहती है. महम चौबीसी का चबूतरा विश्व प्रसिद्द है. यहाँ के दौलत राम को अंग्रेजों ने फांसी दी थी. मदीना , महम, मोखरा, आदि इस खाप के प्रमुख गाँव हैं. यह खाप हरियाणा के रोहतक जिले में है. आनंद सिंह दांगी के अतिरिक्त अनेक राजनेताओं ने इस खाप के चबूतरे पर माथा टेक कर अपनी राजनैतिक यात्रा शुरू की है. महम चौबीसी के अंदर शुगर मिल है जो गांव भैणी महाराज पुर के पास है मिल के डायरेक्टर जितेंद्र सिंह धत्तरवाल जी है गांव भैणी महाराज पुर से अंकित सिंह धत्तरवाल जी हरियाणा धत्तरवाल खाप के प्रधान भी है।[6]

Maham's role in the 1857 AD War of Independence

दलीपसिंह अहलावत लिखते हैं -

.....उस समय रोहतक बंगाल के गवर्नर के मातहत था, तथा कमिश्नरी का हैड क्वार्टर आगरा था। रोहतक का डिप्टी कमिश्नर जोहन एडमलौक था। 23 मई को क्रान्तिकारी सेना ने बहादुरगढ़ में प्रवेश किया और 24 मई को रोहतक पहुंची। डिप्टी कमिश्नर गोहाना के रास्ते करनाल भाग गया। रहे हुए अंग्रेज अधिकारियों को मार दिया गया। जेल के दरवाजे खोल दिये गए, कचहरी को आग लगा दी गयी। क्रान्तिकारी सेना ने शहर के हिन्दुओं को लूटना चाहा परन्तु जाटों ने ऐसा न करने दिया। क्रान्तिकारियों ने खजाने से दो लाख रुपया निकाल लिया। मांडौठी, मदीना, महम की चौकियां लूट ली गईं। सांपला तहसील को आग लगा दी गई। सभी अंग्रेज स्त्रियों को जाटों ने, मुस्लिम राजपूत (रांघड़ों) के विरोध के बावजूद, सही सलामत उनके ठिकानों पर पहुंचा दिया। गोहाना पर गठवाला मलिक जाटों ने कब्जा जमा लिया। अंग्रेजी सेना 30 मई को अम्बाला से रोहतक को चली, परन्तु देशी सेना ने उसे श्यामड़ी (सामड़ी) के जंगल में युद्ध करके हरा दिया। [7]

Swami Omanand Saraswati writes -

१० मई को मेरठ से जो चिन्गारी छूटी वह ११ को देहली आ पहुँची । मेरठ की फौजों में सबसे अधिक हरयाणे के जाट और राजपूत थे । उनके बाद अहीर । उन फौजी सिपाहियों द्वारा यह आग सारे प्रदेश में व्याप्त हो गई । उस समय तक रोहतक बंगाल के गवर्नर के मातहत था, तथा कमिश्नरी का हेड-क्वार्टर आगरा । यहाँ के डिप्टी कमिश्नर जॉन एडमलौक थे । २३ मई को बहादुरगढ़ में शाही फौज ने प्रवेश किया और २४ मई को रोहतक पहुंची । डिप्टी कमिश्नर गोहाने के रास्ते करनाल भाग गया । रहे हुए अंग्रेज अधिकारी मारे गये । जेल के दरवाजे खोल दिये गये, कचहरी को आग लगा दी गई । शाही दस्ते ने शहर के हिन्दुओं को लूटना चाहा पर जाटों ने ऐसा न करने दिया । दो दिन ठहर कर विद्रोहियों ने खजाने से दो लाख रुपया निकाल लिया । मांडौठी, मदीना, महम की चौकियाँ लूट ली गईं । सांपला तहसील में आग लगा दी गई । सभी अंग्रेज स्त्रियों को जाटों ने मुस्लिम राजपूतों (रांघड़ों) के विरोध के बावजूद सही सलामत उनके ठिकानों पर पहुंचा दिया । गोहाना पर गठवाले जाटों ने कब्जा जमा लिया । ३० मई को अंग्रेजी फौज अंबाला से रोहतक चली, पर देशी फौजों के बिगड़ने से श्यामड़ी के जंगल में हार गई । बचे खुचे अंग्रेज दिल्ली को भागे । लुकते-छिपते ये लोग १० जून को सांपला पहुंचे । डिप्टी कमिश्नर सख्त धूप न सह सकने के कारण अंधा हो गया । रोहतक के विद्रोही १४ जून को दिल्ली पहाड़ी की लड़ाई में सम्मिलित हुए थे । जब अंग्रेज रोहतक पर किसी तरह भी काबू न पा सके तो मजबूर होकर उन्होंने २६ जुलाई सन् ५७ को एक घोषणा द्वारा जींद के महाराजा स्वरूपसिंह को सौंप दिया । दिसम्बर के अन्त तक जहां लोग अंग्रेज से लड़ते रहे, वहां जाटों की खापें आपस में भी एक दूसरे पर आक्रमण करती रहीं और बीच-बीच में रांघड़ों और कसाइयों से भी लड़ते रहे ।

(देखें पेज देशभक्तों के बलिदान (पृष्ठ - 325-334) - लेखक स्वामी ओमानन्द सरस्वती)

Archaeological explorations at Meham

Archaeologists exploring the ruins - found under three metres of a mud hillock in the Meham area of Rohtak district - said that an ancient city dating back to the 5,000-year-old Harappan civilisation was being traced. It could be of the Rig Veda era, one official said. Further exploration at the site - referred to as Daksh Khera and located about 100 km from New Delhi - is on. So far only towns and villages - namely Banawali, Bhirdana, Rakhigarhi and Kunal - dating back to the Harappan civilisation had been found in Haryana. No ancient city had been discovered. Archaeologists made the discovery following a media report that a very old skeleton had been found near Farmana Khas village, 12 km from Meham town.[8]

Jat Gotras

About Deshwal Gotra

कप्तान सिंह देशवाल लिखते हैं - यह गाँव महम आजकल रोहतक जिले की तहसील है। यह एक ऐतिहासिक गाँव है। यहाँ पर महम चौबीसी का चबूतरा प्रसिद्ध है। इस चबूतरे पर मुसलमानों, अंग्रेजों व अन्य विदेशी हमलावरों के खिलाफ लड़ने के लिए सर्वखाप पंचायतें भी हुईं हैं। इस गाँव का अपना गौरव व इतिहास है। यह गाँव रोहतक से हिसार रोड पर 35 किलोमीटर पर आबाद है। कहते हैं इस गाँव में जानी चोर की सुरंग है। इस गाँव में ग्यानीराम सुपुत्र सरूपा देशवाल गाँव गंगाणा से किन्हीं कारणों से अपनी जमीन बेचकर यहाँ सामाण रोड पर आकर बस गया। यह परिवार 1950 में महम में आया था। यहाँ पर काफी जमीन खरीद कर अपना काम अच्छी तरह से चला रहे हैं। यह सम्पन्न परिवारों में है। देशवाल गौत्र के यहाँ पर 15-20 परिवार हैं। पुस्तक लिखे जाने तक यहाँ पर 1950 में बलियाणा से भी कुछ परिवार आए हैं।[11]

Notable persons

External links

References

  1. (Śloka 6, Chapter 32, Sabhā Parva.)
  2. Source: archive.org: Puranic Encyclopedia
  3. https://www.wisdomlib.org/definition/mahottha
  4. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.730
  5. शैरीषकं महेच्छं च वशे चक्रे महाद्युतिः, शिबींस त्रिगर्तान अम्बष्ठान मालवान पञ्च कर्पटान (II.29.6)
  6. Dr Ompal Singh Tugania: Jat Samuday ke Pramukh Adhar Bindu,p.20
  7. Jat History Dalip Singh Ahlawat/Chapter VII (Page 612)
  8. [1]
  9. Kaptan Singh Deshwal :Deshwal Gotra Ka Itihas (Volume II) (Page 60)
  10. जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत (एकादश अध्याय) (पृष्ठ संख्या 1026)
  11. Deshwal Gotra Ka Itihas (Volume II) (Page 60)

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