Bhopal

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Author:Laxman Burdak, IFS (R)

Map of Bhopal District‎

Bhopal (भोपाल) is Capital city and district headquarters in Madhya Pradesh.

Variants

History

Bhopal District

Bhopal is said to have been founded by the Parmar King Raja Bhoj (1000–1055), who had his capital at Dhar. The city was originally known as Bhojpal named after Bhoj. In the 17th century Afghan Sardar Dost Mohammed Khan, who was a commander in the Mughal army posted at Mangalgarh, which lies to the north of the modern city of Bhopal took advantage of the disintegration of the Mughal empire, he usurped Mangalgarh and Berasia (now a tehsil of the Bhopal District). Sometime later, he helped the Gond Queen Kamalapati by executing her husband's assassins and restoring the little Gond kingdom back to her. The Queen gave him a princely sum of money and the Mouza village (which is situated near modern Bhopal city). After the death of last Gond queen, Dost Mohammed Khan took his chance and seized the little Gond Kingdom and established his capital 10 km away from modern Bhopal, at Jagdishpur. He named his capital Islamnagar, meaning the city of Islam. He built a small fort and some palaces at Islam nagar, the ruins of which can still be seen today. After few years, he built a bigger fort situated on the northern bank of the Upper Lake. He named this new fort Fatehgarh ("the fort of victory"). Later the capital was shifted to the current city of Bhopal.


Buddhist Inscription at Nagauri near Sanchi

Recently Inscription of Buddha have been discovered at village Nagauri in Nateran tahsil in Vidisha district of Madhya Pradesh. This Inscription is of 11-12th century and engraved on a rocks of 4-5 feet high. The archaeologists are of the view that there must some more inscription like this. There is a need to further research.

भूपाल = भोपाल

विजयेन्द्र कुमार माथुर[1] ने लेख किया है ...भूपाल (म.प्र.), (AS, p.675): कहते हैं कि परमार वंशीय नरेशों में प्रसिद्ध राजा भोज ने 1010 ई. के लगभग इस नगर को बसाया था. भोज पाल इसका प्राचीन नाम था. अब तक भोपाल का एक भाग भोजपुर के नाम से प्रसिद्ध है जहां का प्राचीन कला पूर्ण शिवालय इस स्थान का सुंदर स्मारक है. भोपाल के निकट प्राचीन काल में एक बड़ी झील राजा भोज ने सिंचाई के लिए बनवाई थी. इसके बांध को गुजरात के सुल्तान होशंगशाह ने कटवा दिया था. कहा जाता है कि 3 साल तक इस झील का पानी निरंतर बहता रहा और 3 साल में यह स्थान बसने योग्य हुआ था. आजकल भी भोपाल के पास का क्षेत्र बहुत उपजाऊ है. वर्तमान ताल इसी प्राचीन झील का अवशिष्ट अंश हो सकता है. किंवदंती के अनुसार वास्तव में यह झील बहुत पुरानी है और कई लोग इसे रामायण में वर्णित पंपसर भी मानते हैं किंतु यह अभिज्ञान ठीक नहीं जान पड़ता क्योंकि पंपासरोवर [p.676]: किष्किंधा के निकट था (देखें पंपा, किष्किंधा). भोपाल के ताल के तट पर प्राचीन गोंड शासिका कमलापति का दो मंजिला भवन है. कहा जाता है यह प्रासाद पहले 7 मंजिला था और इसकी कई मंजिल तालाब के अंदर हैं. यह जन-प्रवाद यहां प्रचलित है कि कमलापति ने अपना पति की मृत्यु का संकेत पाकर अट्टालिका से नीचे ताल में कूदकर आत्महत्या कर ली थी.

भोपाल में, भूतपूर्व मुसलमानी राजवंश का राज्य 18 वीं सदी के उत्तरार्ध में स्थापित हुआ था. इस राजवंश के शासनकाल के अनेक राज महल तथा सुंदर भवन यहाँ के भव्य स्मारक हैं. इनमें सात मंजिला ताजमहल जो शाहजहां बेगम का निवास-गृह था, अब भी भोपाल के गतवैभव का साक्षी है. सचिवालय से प्राय 2 फर्लांग की दूरी पर भोपाल के भूतपूर्व नवाब हमीदुल्ला खां का महल है जिसे अहमदाबाद कहा जाता है.

भोपाल परिचय

भोपाल शहर मध्य प्रदेश राज्य की राजधानी है। भोपाल मध्य प्रदेश राज्य के मध्य भारत में स्थित है। भूतपूर्व रजवाड़े भोपाल का एक हिस्सा यह शहर मालवा पठार की उपजाऊ समतल भूमि पर स्थित है। भोपाल शहर का नाम राजा भोज द्वारा शहर की सीमाओं के अंदर निर्मित एक ताल, भोज ताल से लिया गया है। एक और मत यह है कि यह 'भोज पाल' या 'भोज के बांध' पर आधारित है। जिसने भोपाल शहर के ताल को उत्पन्न किया। भोपाल शहर 1722 से अस्तित्व में है, जब दोस्त मुहम्मद ने मौजूदा ताल की उत्तरी दिशा में फ़तेहगढ़ क़िले का निर्माण प्रारंभ किया। किसी भी अतिरेकी बहाव को नियंत्रित करने के लिए ऊपरी ताल (बड़ा तालाब) और निचला ताल एक जलसेतु से जुड़े हैं।

स्थापना: बादशाह अकबर ने रानी दुर्गावती के गोंडवाना राज्य से अलग करके जागीर बना दिया। कुछ काल तक यह एक नवाब के अधीन रहा था और उसके पश्चात् 1761 ई. के बाद वह अर्ध-स्वतंत्र हो गया। लेकिन 1817 ई. में इसका शासक अंग्रेज़ों के साथ सहायक संधि करने के लिए बाध्य हुआ। 1948 ई. में भोपाल रियासत भारतीय गणराज्य में मिला ली गयी और संप्रति यह मध्य प्रदेश की राजधानी है।

इतिहास: भोपाल ब्रिटिश साम्राज्य का दूसरा सबसे बड़ा मुस्लिम प्रदेश था। इसके शासक ब्रिटिश शासन के प्रति निष्ठावान बने रहे और मराठों के साथ कई युद्ध भी लड़े। 1818 में स्थापित भोपाल एजेंसी ब्रिटीश सेंट्रल इंडिया एजेंसी का एक उपखंड था, जो पूर्व सामंती प्रदेशों राजगढ़, नरसिंहगढ़ और दूसरी कई रियासतों को समाविष्ट किए हुए था। आज़ादी के बाद भी भोपाल भारत की एक पृथक् रियासत बना रहा और 1949 में इसे भारत में मिला लिया गया। 1952 में नवाबों का निर्बाध शासन समाप्त हो गया और एक प्रधान आयुक्त का राज्य स्थापित किया गया। 1956 में यह मध्य प्रदेश राज्य के साथ मिल गया।

भोपाल गैस त्रासदी: 2 और 3 दिसंबर 1994 की दरमियानी रात को भोपाल में यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के कीटनाशक संयंत्र से मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) नाम की गैस सहित कई विषैली गैसों का 32 टन के आसपास रिसाव हुआ। मरने वालों की संख्या शुरू में 5000 के आसपास दर्ज की गयी थी। कई आंकड़ों के हिसाब से दो सप्ताह के भीतर 18000 मौतें हुईं और अनुमान है की गैस विषाक्तता से संबंधित रोगों से 8000 मौतें और हुईं। ग्रीनपीस संगठन ने अपने अनुमान में हताहतों की संख्या 20,000 के आसपास बताई। हर साल 3 दिसंबर को आधिकारक रूप से शोक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सभी भोपाल के समस्त सरकारी कार्यालय बंद रहते हैं। भोपाल गैसकांड को अक्सर दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना के रूप में पेश किया जाता है।

यातायात और परिवहन: वायु मार्ग: राजा भोज विमानतल को भी भोपाल हवाई अड्डा भी कहा जाता है। यह ओल्‍ड सिटी से 12 किलोमीटर की दूरी पर है। दिल्ली, मुंबई और इंदौर से यहाँ के लिए इंडियन एयरलाइन्‍स की नियमित हवाई जहाज़ हैं। ग्वालियर से यहाँ के लिए सप्‍ताह में चार दिन हवाई जहाज़ हैं।

रेल मार्ग: भोपाल का रेलवे स्‍टेशन देश के विविध रेलवे स्‍टेशनों से जुड़ा हुआ है। यह रेलवे स्‍टेशन दिल्‍ली - चैन्नई रूट पर पडता है। शताब्‍दी एक्‍सप्रेस भोपाल को दिल्‍ली से सीधा जोड़ती है। साथ ही यह शहर मुम्‍बई, आगरा, ग्वालियर, झांसी, उज्जैन आदि शहरों से अनेक रेलगाड़ियों के माध्‍यम से जुड़ा हुआ है।

सडक मार्ग: सांची, इंदौर, उज्जैन, खजुराहो, पंचमढ़ी, जबलपुर आदि शहरों से आसानी से सडक मार्ग से भोपाल पहुँचा जा सकता है। मध्‍य प्रदेश और पड़ोसी राज्‍यों के अनेक शहरों से भोपाल के लिए नियमित बसें चलती हैं।

बड़ा तालाब: 'बड़ा तालाब' मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मध्य में स्थित मानव निर्मित एक झील है। इस तालाब का निर्माण 11वीं सदी में किया गया था। भोपाल की यह विशालकाय जल संरचना अंग्रेज़ी में 'अपर लेक' कहलाती है। इसी को हिन्दी में 'बड़ा तालाब' कहा जाता है। इसे एशिया की सबसे बड़ी कृत्रिम झील भी माना जाता है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पश्चिमी हिस्से में स्थित यह तालाब भोपाल के निवासियों के पीने के पानी का सबसे मुख्य स्रोत है।

भोपाल के 'बड़े तालाब' का निर्माण 11वीं सदी में 'परमार वंश' के राजा भोज ने करवाया था। बेहद प्राचीन और जन-उपयोगी इस जलाशय का इतिहास अनेक खट्टे-मीठे अनुभवों से भरा हुआ है। तालाब का कुल भराव क्षेत्रफल 31 किलोमीटर है। भोपाल की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या को यह झीलनुमा तालाब लगभग तीस मिलियन गैलन पानी रोज देता है। इस बड़े तालाब के साथ ही एक 'छोटा तालाब' भी यहाँ मौजूद है और यह दोनों जल क्षेत्र मिलकर एक विशाल 'भोज वेटलैण्ड' का निर्माण करते हैं, जो कि अन्तर्राष्ट्रीय रामसर सम्मेलन के घोषणा पत्र में संरक्षण की संकल्पना हेतु शामिल है।

उद्योग और व्यापार: भोपाल शहर ने व्यापार, वाणिज्य और उद्योग में तेज़ी से प्रगति की है। यह अनाज, तेल, किराना व लेखन-सामग्री का एक व्यापक थोक और खुदरा केंद्र है। लगभग एक-तिहाई जनता श्रमिकों के रूप में गिनी जाती है। नौ औद्योगिक, श्रेणियों में से श्रमिक मुख्यतः अन्य सेवाओं, व्यापार, वाणिज्य, ग़ैर घरेलू विनिर्माण, निर्माण और परिवहन व संचार में संलग्न हैं। भोपाल में मुख्य उद्योगों में कपास और आटा मिलें, वस्त्र बुनाई, चित्रकारी और ट्रांसफार्मर, स्विचगियर, कर्षण मोटर और दूसरे भारी विद्युत उपकरणों के अतिरिक्त दियासलाई, लाख और खेल सामग्री का निर्माण भी सम्मिलित है। बटुवा निर्माण, ज़री कसीदाकारी, काष्ठ और लौह फ़र्नीचर का उत्पादन, हलवाई और नानाबाई की दुकान व बीड़ी निर्माण लघु उद्योग में शामिल हैं।

पर्यटन: भोपाल का मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों में बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। भोपाल शहर प्राकृतिक सुन्दरता और सांस्कृतिक विरासत के साथ साथ आधुनिक शहर के सभी आयाम प्रस्तुत करता है। प्राचीनता के वैभव से मन भर जाए और अगर मध्य युगीन भारत को देखने का मन करे तो आप भोपाल शहर में घूमना शुरू कर सकते है क्योंकि भोपल ने अपने अन्दर अज भी नवाबी तहजीब और नवानियत को कैद कर रखा है। मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल का दौरा मध्‍य कालीन नवाबों के वैभव की याद दिला देता है।

संदर्भ: भारतकोश-भोपाल

नागौरी शिलालेख

साँची के पास नागौरी गाँव में यह शिलालेख प्राप्त हुए हैं जो साँची मुख्य स्तूप से नागौरी गाँव की और के ढलान वाले सबसे निचले हिस्से में बुद्ध का शिलालेख स्थित है. इस शिलालेख की लिपि नागरी और भाषा संस्कृत है. दो पंक्तियों में अभिलेख और उसके नीचे भगवन बुद्ध से सम्बंधित कहानी उत्कीर्ण है. इसमें लिखा है कि जब भगवान बुद्ध सिंहासन पर बैठकर (पद्मासन)तपस्या कर रहे थे तो उनकी तपस्या में बाधा डालने के लिए दोनों तरफ से उत्तेजित अवस्था में हाथी उन्हें अपनीअपनी और खींच रहे थे. इस अवस्था से निकलने के लिए भगवान बुद्ध अपने तपोबल से ऊपर उठ गए और हाथी के खींचने का उन पर कोई असर नहीं हुआ. [2]

गोनर्द

विजयेन्द्र कुमार माथुर[3] ने लेख किया है ...गोनर्द (AS, p.300) पाली ग्रंथ 'सुत्तनिपात' के अनुसार विदिशा तथा उज्जयिनी के मार्ग के बीच में स्थित एक नगर था। इस नगर को शुंग काल के उद्भट विद्वान् पतंजलि का जन्म स्थान माना जाता है। पतंजलि की माता का नाम 'गोणिका' था। ये 'योग दर्शन' तथा पाणिनि के व्याकरण के 'महाभाष्य' के विख्यात रचयिता थे। कई विद्वानों के मत में 'चरकसंहिता' के निर्माता भी पतंजलि ही थे। ऐसा जान पड़ता है कि गोनर्द की स्थिति भोपाल के निकट थी।

Tahsils in Bhopal District

Jat gotras in Bhopal

Adhran, Ahlawat, Anjane, Atri, Balhara, Balyan, Bangadwa, Barach, Barad, Bargoti, Basbana, Basman, Baswan, Beda, Bhagor, Bhakal, Bhalothia, Bhamu, Bharengar, Bijarnia, Binda, Bisayti, Bisonia, Bohra, Budhe, Budhwar, Burdak, Chahal, Chahar, Chandel, Chhokar, Choyal, Dabas, Dabisa, Dagar, Dahiya, Dalal, Dandak, Dashpuria, Dedar, Deshwal, Dhadaria, Dhainyar, Dhaka, Dhanerya, Dhankad, Dhankher, Dhatiriya, Dhayal, Didel, Dilwal, Dingwal, Dinwal, Diswar, Dondaria, Dongre, Dudi, Durwas, Dusadh, Faraswal, Fogat, Foyar, Gahlawat, Garhwal, Gathware, Gehlot, Ghainyar, Ghanghas, Godara, Gode, Godha, Golia, Golya, Gulia, Hanselia, Hathingarwar, Hudda, Indolia, Jakhar, Jangoo, Jhunkale, Kadyan, Kajal, Kakran, Kalhari, Kalkhanda, Kashyap, Kaul, Khainwar, Khairwa, Kharb, Khatri, Khoja, Khokhar, Khutel, Kudia, Kuhad, Kuiya, Kulhar, Kundu, Lachau, Lakkad, Lalau, Lalgathwaria, Lamba, Lauchak, Legha, Mali, Mann, Marawat, Mehria, Menchu, Mohla, Motra, Mundel, Nain, Nandav, Narolia, Narwar, Nauhwar, Nawad, Nehra, Ohlan, Pachhare, Padode, Paldia, Palwar, Pander, Paraswan, Paraya, Patel, Pawar, Penda, Poras, Puchhwar, Punia, Rahi, Rajaura, Rana, Ranwa, Rao, Rathi, Rawat, Ruhil, Sangwan, Saran, Saroha, Serawat, Sheshma, Shyorat, Sidia, Sihak, Sikarwar, Sindhu, Sinsinwar, Sirohi, Siwach, Siyak, Sogarwal, Sohrot, Solanki, Soni, Takhar, Tanwar, Tewatia, Thadwar, Thakurel, Thakurela, Thakurele, Thenua, Thukrele, Thusya, Tomar, Toor, Vinda,

Jat Organizations

Notable persons

  • M.S.Solanki - IFS (1957), Madhya Pradesh cadre, DOB:12-8-1927.
  • Daya Ram Dhayal - Donated Rs. 25000/- for School
  • R.S. Kharb - President Govindpura Industries Association, Bhopal-4261619, Phone: 0755-4261619, Home: E-1/70, Arera Colony Bhopal, Mob: 9303134841
  • B.S. Arya - Senior Manager (PSCD), Bank of India, Zonal Office, Jail Road, Bhopal. Res:0755-2554470, Mob: 9425648864.
  • Har Narain Jat Mali: Ex. President Madhya Pradesh Jat Sabha, Bhopal, Mob: 9926900294
  • Radhe Shyam Verma (Palwar) - From Tarawli Kalan village in Berasia tahsil in Bhopal district in Madhya Pradesh. Mob: 9425010554
  • S P S VERMA CHIEF MANAGER(INSPECTION)PUNJAB NATIONAL BANK NEW MARKET BHOPAL MOB 9893591616
  • S K Thakur (Khenwar) - Ex President Madhya Pradesh Jat Sabha, Bhopal, Mob: 9826546968
  • वरुण सिंह दलाल भोपाल मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के आई टी एवं सोशल मीडिया सेल में प्रदेश सचिव

External links

See also

References

  1. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.675-676
  2. पीपुल्स समाचार भोपाल बुधवार 18 अप्रेल 2012
  3. Aitihasik Sthanavali by Vijayendra Kumar Mathur, p.300